आरोप: Ndtv में हिस्सेदारी खरीद पर कांग्रेस का हमला, पूछा- नियमों की अनदेखी पर सेबी चुप क्यों?


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देश के सबसे बड़े उद्योग घराने अदाणी ग्रुप के द्वारा एनडीटीवी चैनल में हिस्सेदारी खरीद पर कांग्रेस ने करारा हमला किया है। कांग्रेस ने कहा है कि अडानी ग्रुप भारी कर्ज में डूबी हुई कंपनी है, इसके बाद भी उसे लगातार भारी कर्ज दिया जा रहा है। मामले में भी नियमों को ताक पर रखकर खरीद की कोशिश की जा रही है, लेकिन आश्चर्यजनक है कि इस मामले में सेबी ने चुप्पी साध रखी है जिस पर किसी खरीद प्रक्रिया में उल्लंघन होने से रोकने की जिम्मेदारी है।    

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि एनडीटीवी की खरीद कंपनी निर्माता को जानकारी दिए बिना और उनकी अनुमति के बिना हो रही है। यह नियमों का उल्लंघन है। इतने बड़े समझौते को अंतिम रूप देने से पहले इसके शेयरधारकों और अन्य हितधारकों को सूचित किया जाना चाहिए था, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। दूसरी बात अदाणी भारी कर्ज में डूबी हुई कंपनी है, लेकिन इसके बाद भी उसे लगातार कर्ज दिया जा रहा है। यदि यह कंपनी डिफाल्टर होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसने ऊपर दी जाएगी। पार्टी ने पूछा है कि कर्ज में डूबी एक कंपनी को किसके आदेश पर कर्ज दिया जा रहा है, इसका खुलासा किया जाना चाहिए।

न्यूयार्क की क्रेडिट रिसर्च फर्म ‘क्रेडिट साइट’ के अनुसार अदाणी ग्रुप के ऊपर कुल कर्ज 2,30,000 करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट के अनुसार अडानी एंटरप्राईज और अदाणी ग्रीन एनर्जी के ऊपर 94,400 करोड़ रुपए का कर्ज है। अदाणी अपनी पर्सनल इक्विटी कैपिटल अपने ग्रुप्स में इंजेक्ट नहीं कर रहा है। 2020 से 2022 के बीच अडानी ग्रुप ने 48 हजार करोड़ रुपए का कर्जा लिया। अप्रैल 2020 से जून 2022 के मध्य दो साल के अंदर 48 हजार करोड़ का कर्जा लिया।  इसमें मात्र स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 18,770 करोड़ रुपए का कर्जा लिया गया। 

अर्थात् 2020 से 2022 के मध्य जो अदाणी ग्रुप ने कर्जा लिया, उसका 40 प्रतिशत कर्जा तो सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने दिया। बाकी 14  ग्लोबल प्राईवेट बैंक्स ने दुनिया के सारे बड़े 14 बैंको ने मिलकर कर्ज दिया जिसमें जापान, अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और स्विटजरलैंड के बैंक शामिल हैं।

पर बढ़ रहा कर्ज
उन्होंने कहा कि 2014 में देश पर उधारी 55.9 लाख करोड़ रुपए की थी, लेकिन वित्तीय वर्ष 2023 में यह उधारी 55.9 लाख करोड़ से बढ़कर 152.17 लाख करोड़ होने का अनुमान है। इस तरह 2014 में हर व्यक्ति पर कर्ज 43,124 रुपये था जो 2023 में बढ़कर 1,09,000 रुपए हो जाएगा।

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देश के सबसे बड़े उद्योग घराने अदाणी ग्रुप के द्वारा एनडीटीवी चैनल में हिस्सेदारी खरीद पर कांग्रेस ने करारा हमला किया है। कांग्रेस ने कहा है कि अडानी ग्रुप भारी कर्ज में डूबी हुई कंपनी है, इसके बाद भी उसे लगातार भारी कर्ज दिया जा रहा है। मामले में भी नियमों को ताक पर रखकर खरीद की कोशिश की जा रही है, लेकिन आश्चर्यजनक है कि इस मामले में सेबी ने चुप्पी साध रखी है जिस पर किसी खरीद प्रक्रिया में उल्लंघन होने से रोकने की जिम्मेदारी है।    

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि एनडीटीवी की खरीद कंपनी निर्माता को जानकारी दिए बिना और उनकी अनुमति के बिना हो रही है। यह नियमों का उल्लंघन है। इतने बड़े समझौते को अंतिम रूप देने से पहले इसके शेयरधारकों और अन्य हितधारकों को सूचित किया जाना चाहिए था, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। दूसरी बात अदाणी भारी कर्ज में डूबी हुई कंपनी है, लेकिन इसके बाद भी उसे लगातार कर्ज दिया जा रहा है। यदि यह कंपनी डिफाल्टर होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसने ऊपर दी जाएगी। पार्टी ने पूछा है कि कर्ज में डूबी एक कंपनी को किसके आदेश पर कर्ज दिया जा रहा है, इसका खुलासा किया जाना चाहिए।

न्यूयार्क की क्रेडिट रिसर्च फर्म ‘क्रेडिट साइट’ के अनुसार अदाणी ग्रुप के ऊपर कुल कर्ज 2,30,000 करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट के अनुसार अडानी एंटरप्राईज और अदाणी ग्रीन एनर्जी के ऊपर 94,400 करोड़ रुपए का कर्ज है। अदाणी अपनी पर्सनल इक्विटी कैपिटल अपने ग्रुप्स में इंजेक्ट नहीं कर रहा है। 2020 से 2022 के बीच अडानी ग्रुप ने 48 हजार करोड़ रुपए का कर्जा लिया। अप्रैल 2020 से जून 2022 के मध्य दो साल के अंदर 48 हजार करोड़ का कर्जा लिया।  इसमें मात्र स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 18,770 करोड़ रुपए का कर्जा लिया गया। 

अर्थात् 2020 से 2022 के मध्य जो अदाणी ग्रुप ने कर्जा लिया, उसका 40 प्रतिशत कर्जा तो सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने दिया। बाकी 14  ग्लोबल प्राईवेट बैंक्स ने दुनिया के सारे बड़े 14 बैंको ने मिलकर कर्ज दिया जिसमें जापान, अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और स्विटजरलैंड के बैंक शामिल हैं।

पर बढ़ रहा कर्ज

उन्होंने कहा कि 2014 में देश पर उधारी 55.9 लाख करोड़ रुपए की थी, लेकिन वित्तीय वर्ष 2023 में यह उधारी 55.9 लाख करोड़ से बढ़कर 152.17 लाख करोड़ होने का अनुमान है। इस तरह 2014 में हर व्यक्ति पर कर्ज 43,124 रुपये था जो 2023 में बढ़कर 1,09,000 रुपए हो जाएगा।



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