सीओए भंग होने के बाद एआईएफएफ ने फीफा को लिखी चिठ्ठी, प्रतिबंध हटाने की मांग की


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अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने मंगलवार को फीफा को एक पत्र लिखा है। उसने फीफा से प्रतिबंध हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशासकों की समिति (सीओए) को भंग करने के बाद एआईएफएफ ने खत लिखकर फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

एआईएफएफ के कार्यवाहक महासचिव सुनंदो धर ने फीफा महासचिव फातमा समौरा को लिखे पत्र में कहा, ”हम आपको बहुत खुशी के साथ यह सूचित कर रहे हैं कि भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय ने हमारे मामले की सुनवाई की और दिनांक 22 अगस्त 2022 के आदेश के माध्यम से सीओए को पूर्ण रूप से हटा दिया है। इस फैसले के बाद एआईएफएफ को अपने कार्यों के संचालन का पूर्ण प्रभार मिल गया है।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘इसे देखते हुए हम फीफा और विशेष रूप से ब्यूरो से एआईएफएफ को निलंबित करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं। निलंबन हटाने के लिए आपके पत्र में निर्धारित शर्तें पूरी कर दी गई हैं इसलिए हम अनुरोध करते हैं कि इस संबंध में जल्द से जल्द आदेश दिया जाए जिससे कि एआईएफएफ भारत में फुटबॉल का सुचारू रूप से संचालन जारी रख पाए।’’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगले आदेश तक प्रशासकों की समिति (सीओए) भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) के मामलों पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने एआईएफएफ के चुनाव भी टाल दिए हैं, जो 28 अगस्त को होने थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि एआईएफएफ पर लगा फीफा का निलंबन को रद्द हो और भारत में अंडर -17 महिला फीफा विश्व कप आयोजित हो सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की टीमों को खेलने की अनुमित मिले।

क्या है मामला?
एआईएफएफ के चुनाव फीफा परिषद के सदस्य प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में दिसंबर 2020 तक होने थे, लेकिन इसके संविधान में संशोधन पर गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई। इसके बाद इसी महीने की शुरुआत में (तीन अगस्त) सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत चुनाव कराने का आदेश दिया था और कहा था कि निर्वाचित समिति तीन महीने की अवधि के लिए एक अंतरिम निकाय होगी। सीओए ने चुनाव को अपने मुताबिक कराने का तय किया और इसमें कुछ पूर्व प्रमुख खिलाड़ियों से वोट कराने का फैसला लिया। इसे फीफा ने तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप माना।

पांच अगस्त को ही फीफा ने तीसरे पक्ष (सीओए) के हस्तक्षेप को लेकर भारतीय फुटबॉल महासंघ को को निलंबित करने की धमकी दी थी। इसके साथ ही फीफा ने अक्तूबर में होने वाले महिला अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी के अपने अधिकार भी छीन लेने की चेतावनी दी थी। 16 अगस्त को फीफा ने कुछ सुधार न होने पर एआईएफएफ को बैन कर दिया। 

भारतीय फुटबॉल महासंघ को अपने 85 साल के इतिहास में पहली बार फीफा से निलंबन झेलना पड़ा। फीफा के इस फैसले ने अक्तूबर में होने वाले अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी के अधिकार भी भारत से छीन लिए। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त प्रशासकों की समिति ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी और 28 अगस्त को चुनाव कराने का फैसला किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द करते हुए सीओए को भंग कर दिया है।

FIFA के नियम क्या कहते हैं?
फीफा के नियमों के मुताबिक, सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई प्रशासकों की समिति के हस्तक्षेप और उनके मुताबिक चुनाव कराए जाने पर फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को सस्पेंड कर दिया। फीफा ने पहले इसी तरह के मामलों में अन्य राष्ट्रीय संघों को भी निलंबित किया है।

विस्तार

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने मंगलवार को फीफा को एक पत्र लिखा है। उसने फीफा से प्रतिबंध हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशासकों की समिति (सीओए) को भंग करने के बाद एआईएफएफ ने खत लिखकर फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

एआईएफएफ के कार्यवाहक महासचिव सुनंदो धर ने फीफा महासचिव फातमा समौरा को लिखे पत्र में कहा, ”हम आपको बहुत खुशी के साथ यह सूचित कर रहे हैं कि भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय ने हमारे मामले की सुनवाई की और दिनांक 22 अगस्त 2022 के आदेश के माध्यम से सीओए को पूर्ण रूप से हटा दिया है। इस फैसले के बाद एआईएफएफ को अपने कार्यों के संचालन का पूर्ण प्रभार मिल गया है।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘इसे देखते हुए हम फीफा और विशेष रूप से ब्यूरो से एआईएफएफ को निलंबित करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं। निलंबन हटाने के लिए आपके पत्र में निर्धारित शर्तें पूरी कर दी गई हैं इसलिए हम अनुरोध करते हैं कि इस संबंध में जल्द से जल्द आदेश दिया जाए जिससे कि एआईएफएफ भारत में फुटबॉल का सुचारू रूप से संचालन जारी रख पाए।’’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगले आदेश तक प्रशासकों की समिति (सीओए) भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) के मामलों पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने एआईएफएफ के चुनाव भी टाल दिए हैं, जो 28 अगस्त को होने थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि एआईएफएफ पर लगा फीफा का निलंबन को रद्द हो और भारत में अंडर -17 महिला फीफा विश्व कप आयोजित हो सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की टीमों को खेलने की अनुमित मिले।

क्या है मामला?

एआईएफएफ के चुनाव फीफा परिषद के सदस्य प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में दिसंबर 2020 तक होने थे, लेकिन इसके संविधान में संशोधन पर गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई। इसके बाद इसी महीने की शुरुआत में (तीन अगस्त) सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत चुनाव कराने का आदेश दिया था और कहा था कि निर्वाचित समिति तीन महीने की अवधि के लिए एक अंतरिम निकाय होगी। सीओए ने चुनाव को अपने मुताबिक कराने का तय किया और इसमें कुछ पूर्व प्रमुख खिलाड़ियों से वोट कराने का फैसला लिया। इसे फीफा ने तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप माना।

पांच अगस्त को ही फीफा ने तीसरे पक्ष (सीओए) के हस्तक्षेप को लेकर भारतीय फुटबॉल महासंघ को को निलंबित करने की धमकी दी थी। इसके साथ ही फीफा ने अक्तूबर में होने वाले महिला अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी के अपने अधिकार भी छीन लेने की चेतावनी दी थी। 16 अगस्त को फीफा ने कुछ सुधार न होने पर एआईएफएफ को बैन कर दिया। 

भारतीय फुटबॉल महासंघ को अपने 85 साल के इतिहास में पहली बार फीफा से निलंबन झेलना पड़ा। फीफा के इस फैसले ने अक्तूबर में होने वाले अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी के अधिकार भी भारत से छीन लिए। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त प्रशासकों की समिति ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी और 28 अगस्त को चुनाव कराने का फैसला किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द करते हुए सीओए को भंग कर दिया है।

FIFA के नियम क्या कहते हैं?

फीफा के नियमों के मुताबिक, सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई प्रशासकों की समिति के हस्तक्षेप और उनके मुताबिक चुनाव कराए जाने पर फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को सस्पेंड कर दिया। फीफा ने पहले इसी तरह के मामलों में अन्य राष्ट्रीय संघों को भी निलंबित किया है।



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