बचपन के साथी को याद कर भावुक हुए अनूप जलोटा, अंतिम विदाई में नहीं दिखा कोई बड़ा चेहरा


रंगकर्मी और बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता मिथिलेश चतुर्वेदी का 3 अगस्त को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सोमवार को ओशिवारा के माहेश्वरी हाल में ब्रह्मभोज के साथ उनकी याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था, जहां बॉलीवुड का कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आया। मिथिलेश चतुर्वेदी कई फिल्मों और धारावाहिकों में काम कर चुके हैं। उम्मीद थी कि कम से कम उनके साथ काम करने वाले कलाकार तो जरूर उन्हें अंतिम विदाई देने आएंगे। इस अवसर पर दिवंगत मिथिलेश चतुर्वेदी के मित्र भजन सम्राट न सिर्फ उपस्थित रहे बल्कि दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए उन्होंने ‘गोविंद जप गोपाल जप’ गाकर प्रार्थना भी की।  

अनूप जलोटा के ‘मिट्ठू’

इस मौके पर भजन सम्राट के नाम से मशहूर रहे अनूप जलोटा अपने बचपन के मित्र मिथिलेश चतुर्वेदी की पत्नी, बेटे आयुष और दोनों बेटियों चारु और निहारिका को सांत्वना देते नजर आए। यहां पर मिथिलेश चतुर्वेदी के बड़े दामाद आशीष चतुर्वेदी और उनके भांजे अनुराग चतुर्वेदी के अलावा परिवार के कुछ निकट संबंधी और मित्रगण ही मौजूद रहे हैं। अनूप जलोटा कहते हैं, ‘बचपन में हमने लखनऊ में एक साथ में बहुत वक्त गुजारा। हम लोग बहुत शरारतें किया करते थे। वह मेरा लंगोटिया यार था। बचपन में उन्हे मैं प्यार से मिट्ठू कहकर बुलाता था। इंडस्ट्री में भले ही लोग उनको मिथिलेश चतुर्वेदी के नाम से जानते हो, मेरे लिए वह हमेशा मिट्ठू ही हैं।’

नारद के किरदारों से मिली शोहरत

मिथिलेश चतुर्वेदी के बड़े भाई प्रेम चतुर्वेदी रंग मंच पर काफी सक्रिय रहते थे। अपने बड़े भाई की प्रेरणा से ही मिथिलेश का भी रंगमंच की तरफ झुकाव हुआ। वह अनूप जलोटा के साथ भी कई कार्यक्रमों में भाग ले चुके है। अनूप जलोटा बताते हैं, ‘मिथिलेश को मुकेश कुमार के गाने बहुत पसंद थे। जब भी मेरे साथ किसी प्रोग्राम में जाते थे तो मुकेश कुमार के ही गाने गाते थे। उन्होंने बॉलीवुड में कई तरह के किरदार निभाए हैं, लेकिन नाटकों में ज्यादातर नारद की ही भूमिका निभाते थे।’

अनूप जलोटा ने दिया फिल्मों में ब्रेक

मिथिलेश चतुर्वेदी को ‘सत्या’, ‘ताल’, ‘फिजा’, ‘कोई मिल गया’, ‘कृष’, ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए जाना जाता है। उन्होंने ‘नीली छतरी’ के अलावा कई धारावाहिकों में भी काम किया लेकिन इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को होगी कि मिथिलेश चतुर्वेदी को सबसे पहला मौका अनूप जलोटा ने देकर अपनी दोस्ती का फर्ज निभाया था। अनूप जलोटा बताते हैं, ‘मैं लखनऊ से मुंबई बहुत पहले ही आ गया था, जब मैं रोनित रॉय को लेकर फिल्म ‘हम दीवाने प्यार के’ बना रहा था तब  मिथिलेश को मुंबई बुला लिया उसके बाद से मिथिलेश मुंबई के ही हो कर रह गए।’ 

सरकारी नौकरी छोड़कर बने अभिनेता

मिथिलेश चतुर्वेदी लखनऊ में सब रजिस्ट्रार के ऑफिस में ऑडिटर की नौकरी करते थे। जब अनूप जलोटा ने उन्हें मुंबई बुलाया तो वह समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेकर मुंबई आ गए। अनूप जलोटा बताते हैं, ‘लखनऊ से मुंबई आने के बाद मिथिलेश हमारे साथ हमारे घर में रहे। बाद में अपने मेहनत के बलबूते अपनी अलग पहचान बनाई है। आज वह हमारे बीच नहीं हैं। उनकी कमी जिंदगी भर रहेगी। लेकिन, हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ। इसमें दूसरा कोई कुछ नहीं कर सकता।’



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