मैं मिटने को तैयार हूं: अंग्रेज कलेक्टर के सामने दहाड़े थे दीवान,भूदान आंदोलन में पूरा गांव कर दिया था दान


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हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र की मंगरौठ रियासत के दीवान शत्रुघ्न सिंह द्वारा अंग्रेज कलेक्टर के सामने चंदा देने से इनकार करने पर सभा में सन्नाटा छा गया। तहसीलदार ने कड़कदार आवाज में पूछा इसका अंजाम जानते हो। दीवान ने कहा, “जानता हूं मिटने को तैयार हूं’’। यह कहते हुए सभा छोड़कर बाहर निकल आए।
1914 ईं में जर्मनी और इंग्लैंड के बीच प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ हो चुका था। देश पर शासन कर रही अंग्रेजी हुकूमत जमीदारों, सेठ, साहूकारों व राजाओं से युद्ध के लिए चंदा वसूल रही थी। 1916 ई में अंग्रेज कलेक्टर की सदारत में राठ तहसील में सभी जमींदारों की बैठक बुलाई गई।

बैठक में नाम पुकारे जाने पर जमींदार अधिक से अधिक चंदा देने की हामी भर रहे थे। अंग्रेज कलेक्टर के सामने मंगरौठ के दीवान शत्रुघ्न सिंह से पूछा गया आप कितना चंदा देंगे। इस युवा जमींदार ने निर्भीकता से कहा, ’’एक भी पैसा नहीं’’। जिस अंग्रेजी शासन से सारी पृथ्वी थर्राती थी उसके सामने दीवान का यह उत्तर सुनकर सभा में सन्नाटा पसर गया।

तहसीलदार ने रौबदार आवाज में जमींदारी मटियामेट करने की धमकी दी। दीवान ने भी उसी लहजे में जवाब दिया, जानता हूं मिटने को तैयार हूं। तहसील के बाहर निकलते ही क्रांतिकारी मूलचंद्र शर्मा व मातादीन बुधौलिया ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। बाजार से उनके आवास तक जयजयकार करते हुए जुलूस निकाला गया।

भूदान आंदोलन में पूरा गांव कर दिया था दान
वीरभूमि बुंदेलखंड में राठ क्षेत्र के मंगरौठ गांव में 1901 में जन्मे दीवान शत्रुघ्न सिंह मंगरौठ जागीर के जमींदार थे। किशोरावस्था से ही स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। विवाह फतेहपुर जिले के गाजीपुर के जमींदार की कन्या राजेंद्र कुमारी से हुआ।

रानी राजेंद्र कुमारी ने आजादी की लड़ाई में पति का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। आजादी का यह मतवाले ने अपनी पत्नी सहित जेल की यातनाएं सहीं। विनोवा भावे के भूदान आंदोलन से प्रेरित होकर अपना पूरा गांव दान कर दिया। वर्ष 2009 में अमेरिका से दीवान साहब के फोटो के साथ डाक टिकट जारी हुआ था।

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हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र की मंगरौठ रियासत के दीवान शत्रुघ्न सिंह द्वारा अंग्रेज कलेक्टर के सामने चंदा देने से इनकार करने पर सभा में सन्नाटा छा गया। तहसीलदार ने कड़कदार आवाज में पूछा इसका अंजाम जानते हो। दीवान ने कहा, “जानता हूं मिटने को तैयार हूं’’। यह कहते हुए सभा छोड़कर बाहर निकल आए।

1914 ईं में जर्मनी और इंग्लैंड के बीच प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ हो चुका था। देश पर शासन कर रही अंग्रेजी हुकूमत जमीदारों, सेठ, साहूकारों व राजाओं से युद्ध के लिए चंदा वसूल रही थी। 1916 ई में अंग्रेज कलेक्टर की सदारत में राठ तहसील में सभी जमींदारों की बैठक बुलाई गई।



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