बांदा: 60 जवान और 8 बोट… नहीं खोज सके 32 लापता, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 6 टीमें लगीं


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बबेरू/मर्का। यमुना नदी में नाव डूबने से लापता हुए 32 लोगों को खोजने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल छह टीमें लगी हैं। इन टीमों के 60 जवान आठ मोटर बोट से पूरा दिन तलाशने के बाद भी किसी को नहीं ढूंढ पाए हैं।
मर्का थाना क्षेत्र के कस्बे से फतेहपुर जिले के असोथर गांव की तरफ जा रही नाव गुरुवार को दोपहर पतवार और टोढ़िया (नाव के अगला तिकोना भाग) टूटने से यमुना नदी में पलट गई थी। इसमें 50 लाग सवार थे। किसी तरह 15 लोग तैरकर निकल आए थे। एक मासूम सहित तीन लोगों के शव मिले, लेकिन प्रशासन के मुताबिक 17 लोग लापता हैं।
12 किमी क्षेत्र में चला सर्च अभियान
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने 12 किलोमीटर दूर तक लापता लोगों को खोजने का प्रयास किया। रात में जेनरेटर से हाई मास्ट लाइटों का उजाला किया गया।
एक शव मिलने की चर्चा
ग्रामीणों ने बताया कि फतेहपुर सीमा पर असोथर गांव के नजदीक एक शव मिला है। उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। हालांकि पुलिस ने शव मिलने की पुष्टि नहीं की है।
‘शार्टकट’ रास्ता बन गया काल
बबेरू/मर्का। 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर और समय बचाने को लेकर ‘शार्टकट’ रास्ता गुरुवार को काल साबित हुआ। क्षेत्रीय ग्रामीणों के मुताबिक औगासी घाट में यमुना नदी पर पुल बना है। आवागमन शुरू है, लेकिन मर्का के औगासी घाट पुल के रास्ते असोथर गांव पहुंचने में लगभग 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर पड़ता है। इसमें करीब पौन घंटा समय ज्यादा लगता है। दूसरी तरफ मर्का से असोथर गांव तक यमुना नदी के रास्ते नाव के जरिए मात्र 600 मीटर की दूरी है। मात्र 20 मिनट में यह दूरी पूरी हो जाती है। नाविक इसका फायदा उठाकर मनमाने ढंग से नावों में लोगों को बैठाते हैं। गुरुवार को यही शार्टकट रास्ता नाव सवारों को भारी पड़ गया। इस घटना के लिए ग्रामीण प्रशासन और पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
प्रशासन के अनुसार लापता की सूची
मरका गांव निवासी माया (40) व उसका पुत्र महेंद्र (2), गौरी ताला (मरका) गांव की उजिरिया (40), असोथर गांव निवासी करन (15), फुलुवा (48) व मुन्ना (36), फतेहगंज गांव निवासी जयचंद्र (19), समगरा गांव निवासी रामकरन (45), सरजो का डेरा (मरका) निवासी प्रीति (20), फतेहपुर के लक्ष्मणपुर गांव निवासी राजू (25), मुड़वारा गांव की गीता (36), कुमेढ़ा गांव की सीमा (40), निभौर गांव निवासी सीता व बाबू आदि शामिल हैं।

बबेरू/मर्का। यमुना नदी में नाव डूबने से लापता हुए 32 लोगों को खोजने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल छह टीमें लगी हैं। इन टीमों के 60 जवान आठ मोटर बोट से पूरा दिन तलाशने के बाद भी किसी को नहीं ढूंढ पाए हैं।

मर्का थाना क्षेत्र के कस्बे से फतेहपुर जिले के असोथर गांव की तरफ जा रही नाव गुरुवार को दोपहर पतवार और टोढ़िया (नाव के अगला तिकोना भाग) टूटने से यमुना नदी में पलट गई थी। इसमें 50 लाग सवार थे। किसी तरह 15 लोग तैरकर निकल आए थे। एक मासूम सहित तीन लोगों के शव मिले, लेकिन प्रशासन के मुताबिक 17 लोग लापता हैं।

12 किमी क्षेत्र में चला सर्च अभियान

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने 12 किलोमीटर दूर तक लापता लोगों को खोजने का प्रयास किया। रात में जेनरेटर से हाई मास्ट लाइटों का उजाला किया गया।

एक शव मिलने की चर्चा

ग्रामीणों ने बताया कि फतेहपुर सीमा पर असोथर गांव के नजदीक एक शव मिला है। उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। हालांकि पुलिस ने शव मिलने की पुष्टि नहीं की है।

‘शार्टकट’ रास्ता बन गया काल

बबेरू/मर्का। 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर और समय बचाने को लेकर ‘शार्टकट’ रास्ता गुरुवार को काल साबित हुआ। क्षेत्रीय ग्रामीणों के मुताबिक औगासी घाट में यमुना नदी पर पुल बना है। आवागमन शुरू है, लेकिन मर्का के औगासी घाट पुल के रास्ते असोथर गांव पहुंचने में लगभग 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर पड़ता है। इसमें करीब पौन घंटा समय ज्यादा लगता है। दूसरी तरफ मर्का से असोथर गांव तक यमुना नदी के रास्ते नाव के जरिए मात्र 600 मीटर की दूरी है। मात्र 20 मिनट में यह दूरी पूरी हो जाती है। नाविक इसका फायदा उठाकर मनमाने ढंग से नावों में लोगों को बैठाते हैं। गुरुवार को यही शार्टकट रास्ता नाव सवारों को भारी पड़ गया। इस घटना के लिए ग्रामीण प्रशासन और पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

प्रशासन के अनुसार लापता की सूची

मरका गांव निवासी माया (40) व उसका पुत्र महेंद्र (2), गौरी ताला (मरका) गांव की उजिरिया (40), असोथर गांव निवासी करन (15), फुलुवा (48) व मुन्ना (36), फतेहगंज गांव निवासी जयचंद्र (19), समगरा गांव निवासी रामकरन (45), सरजो का डेरा (मरका) निवासी प्रीति (20), फतेहपुर के लक्ष्मणपुर गांव निवासी राजू (25), मुड़वारा गांव की गीता (36), कुमेढ़ा गांव की सीमा (40), निभौर गांव निवासी सीता व बाबू आदि शामिल हैं।



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