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बांदा : भूरागढ़ और पैलानी में बनने वाले बैराजों की क्षमता बढ़ेगी, केन-बेतवा परियोजना के तहत किए गए अधिग्रहीत

ByNews Desk

Aug 9, 2022


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बांदा। जिले के भूरागढ़ और पैलानी में बनने वाले बैराजों को केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत जल शक्ति मंत्रालय ने अधिग्रहीत कर लिया है। प्रत्येक की क्षमता 130 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) है, जो 20 से 25 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है। मार्च 2023 तक सर्वे का काम पूरा होने के बाद दोनों बैराज का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसी के बाद क्षमता का निर्णय होगा।
करीब 2000 करोड़ की लागत से बनने वाले इन दोनों बैराज से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड की 192479 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी और जिले के करीब 20 लाख लोगों को पीने का साफ पानी मिलेगा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता श्याम जी चौबे का कहना है कि प्रारंभिक प्रस्ताव के दौरान यह रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसको अथॉरिटी ने मंजूरी दी है। बैराज के आसपास की जमीन की मिट्टी के सर्वे का काम पूरा होने के बाद इनकी क्षमता बढ़ाई सकती है।
करीब दो माह पहले केन-बेतवा अथॉरिटी से मंजूरी मिलने के बाद इन बैराजों के टेकओवर की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। चूंकि बारिश होने से केन नदी का जल स्तर बढ़ गया है। इसके चलते सर्वे का काम रोक दिया गया है। अब नदी का जलस्तर कम होने पर नवंबर के बाद फिर से सर्वे शुरू होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
…ताकि अधिक लोगों को मिल सके लाभ
पहला बैराज बांदा शहर के निकट भूरागढ़ और दूसरा पैलानी क्षेत्र में केन व चंद्रावल नदी के मिलान के करीब बनना है। बैराज की क्षमता के लिए यहां की मिट्टी की जांच कराई जा रही है। मिट्टी व अन्य तकनीकी सर्वे होने के बाद बैराज का वृहद स्तर पर निर्माण कार्य कराया जा सकता है।

बांदा। जिले के भूरागढ़ और पैलानी में बनने वाले बैराजों को केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत जल शक्ति मंत्रालय ने अधिग्रहीत कर लिया है। प्रत्येक की क्षमता 130 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) है, जो 20 से 25 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है। मार्च 2023 तक सर्वे का काम पूरा होने के बाद दोनों बैराज का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसी के बाद क्षमता का निर्णय होगा।

करीब 2000 करोड़ की लागत से बनने वाले इन दोनों बैराज से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड की 192479 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी और जिले के करीब 20 लाख लोगों को पीने का साफ पानी मिलेगा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता श्याम जी चौबे का कहना है कि प्रारंभिक प्रस्ताव के दौरान यह रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसको अथॉरिटी ने मंजूरी दी है। बैराज के आसपास की जमीन की मिट्टी के सर्वे का काम पूरा होने के बाद इनकी क्षमता बढ़ाई सकती है।

करीब दो माह पहले केन-बेतवा अथॉरिटी से मंजूरी मिलने के बाद इन बैराजों के टेकओवर की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। चूंकि बारिश होने से केन नदी का जल स्तर बढ़ गया है। इसके चलते सर्वे का काम रोक दिया गया है। अब नदी का जलस्तर कम होने पर नवंबर के बाद फिर से सर्वे शुरू होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

…ताकि अधिक लोगों को मिल सके लाभ

पहला बैराज बांदा शहर के निकट भूरागढ़ और दूसरा पैलानी क्षेत्र में केन व चंद्रावल नदी के मिलान के करीब बनना है। बैराज की क्षमता के लिए यहां की मिट्टी की जांच कराई जा रही है। मिट्टी व अन्य तकनीकी सर्वे होने के बाद बैराज का वृहद स्तर पर निर्माण कार्य कराया जा सकता है।



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