बांदा : मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला, आर्थोपेडिक विभाग में डिजिटल एक्सरे मशीन तीन साल से खराब


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बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज शुरू हुए लगभग छह साल हो गए हैं। यहां व्यवस्थाएं सिर्फ नाम की हैं। हर दिन ओपीडी में सुबह आठ से दो बजे तक लगभग एक हजार से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनमें करीब 80 से 90 मरीजों को अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की जरूरत होती है। इसके बावजूद आर्थोपेडिक विभाग में लगी एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। वहीं, मंगलवार को अल्ट्रासाउंड विभाग में ताला लटकता रहा। डॉक्टर के लिखने पर मरीजों को मजबूरन बाहर से अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे कराना पड़ रहा। इसके लिए उन्हें 600 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक तीन आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। सभी चालू हालत में हैं। इसी तरह चार एक्सरे मशीनें हैं। इनमें दो मोबाइल एक्सरे मशीनें शामिल हैं। आर्थो विभाग में लगी 800 एमए क्षमता की डिजिटल एक्सरे मशीन करीब तीन साल से खराब है। एक मात्र इमरजेंसी में लगी एक्सरे मशीन से काम हो रहा है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी भी आड़े आ रही है। फिलहाल सीटी स्कैन की मेडिकल कॉलेज में सुविधा नहीं है।
जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए रेडियोलाजिस्ट डॉ. पीएस सागर यहां संविदा पर नियुक्त हैं। लेकिन वह ज्यादा समय नहीं दे पा रहे। इससे रेडियोलॉजी विभाग पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहा। एक सीनियर रेजीडेंट (रेडियोलॉजिस्ट) मिल गए हैं। 31 अगस्त तक कार्यभार ग्रहण करने की उम्मीद है। – डॉ. मुकेश कुमार यादव
प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
मेडिकल कॉलेज को मिले तीन नए डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि हाल ही में लखनऊ में हुई काउंसलिंग के बाद तीन नए वरिष्ठ डॉक्टर मेडिकल कालेज को मिल गए हैं। इनमें एक रेडियोलॉजिस्ट समेत एक फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैब्रिटेशन व एक आर्थोपेडिक शामिल हैं। इसी माह के अंत तक कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश हैं। इसके पूर्व कानपुर के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक का यहां स्थानांतरण हुआ था। लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। इस बाबत शासन को अवगत कराया गया है।

बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज शुरू हुए लगभग छह साल हो गए हैं। यहां व्यवस्थाएं सिर्फ नाम की हैं। हर दिन ओपीडी में सुबह आठ से दो बजे तक लगभग एक हजार से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनमें करीब 80 से 90 मरीजों को अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की जरूरत होती है। इसके बावजूद आर्थोपेडिक विभाग में लगी एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। वहीं, मंगलवार को अल्ट्रासाउंड विभाग में ताला लटकता रहा। डॉक्टर के लिखने पर मरीजों को मजबूरन बाहर से अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे कराना पड़ रहा। इसके लिए उन्हें 600 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक तीन आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। सभी चालू हालत में हैं। इसी तरह चार एक्सरे मशीनें हैं। इनमें दो मोबाइल एक्सरे मशीनें शामिल हैं। आर्थो विभाग में लगी 800 एमए क्षमता की डिजिटल एक्सरे मशीन करीब तीन साल से खराब है। एक मात्र इमरजेंसी में लगी एक्सरे मशीन से काम हो रहा है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी भी आड़े आ रही है। फिलहाल सीटी स्कैन की मेडिकल कॉलेज में सुविधा नहीं है।

जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए रेडियोलाजिस्ट डॉ. पीएस सागर यहां संविदा पर नियुक्त हैं। लेकिन वह ज्यादा समय नहीं दे पा रहे। इससे रेडियोलॉजी विभाग पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहा। एक सीनियर रेजीडेंट (रेडियोलॉजिस्ट) मिल गए हैं। 31 अगस्त तक कार्यभार ग्रहण करने की उम्मीद है। – डॉ. मुकेश कुमार यादव

प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।

मेडिकल कॉलेज को मिले तीन नए डॉक्टर

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि हाल ही में लखनऊ में हुई काउंसलिंग के बाद तीन नए वरिष्ठ डॉक्टर मेडिकल कालेज को मिल गए हैं। इनमें एक रेडियोलॉजिस्ट समेत एक फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैब्रिटेशन व एक आर्थोपेडिक शामिल हैं। इसी माह के अंत तक कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश हैं। इसके पूर्व कानपुर के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक का यहां स्थानांतरण हुआ था। लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। इस बाबत शासन को अवगत कराया गया है।



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