ब्रिटेन के रिसर्च संस्थान ने पहले रूसी रिसर्चर को ठुकराया, अब माफी मांगी


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ब्रिटेन के रिसर्च संस्थान ने रूस की एक युवा शोधकर्ता से माफी मांगी है। कुछ महीने पहले इसी संस्थान ने उस रिसर्चर को अपने यहां दाखिला देने का ऑफर वापस ले लिया था। ऑफर वापस लेते हुए संस्थान ने कहा था कि चूंकि वह रूसी है, इसलिए उसे इस संस्थान में दाखिला नहीं मिल सकता। अब संस्थान ने उस वैज्ञानिक से माफी मांगते हुए उन्हें फिर से अपने यहां ज्वाइन करने के लिए आमंत्रित किया है।

ग्लासगो शहर में स्थित जीवन विज्ञान अनुसंधान संस्थान द बीटसन इंट्स्टीट्यूट ब्रिटेन से सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में एक है। यह संस्थान में कैंसर संबंधी अपने अनुसंधान के लिए मशहूर है। जब ये खबर सामने आई कि इस संस्थान ने एक रिसर्चर को दिया गया ऑफर सिर्फ उसकी राष्ट्रीयता यानी उसके रूसी होने के आधार पर वापस ले लिया, तो उसकी बड़े पैमाने पर निंदा हुई। रूसी शोधकर्ता ने इस संस्थान के पीएचडी कोर्स में दाखिला लेने के लिए अर्जी दी थी, जिसे स्वीकार करने के बाद संस्थान ने ठुकरा दिया था।

चौतरफा आलोचना के बाद संस्थान के एक सदस्य ने रूसी वैज्ञानिक को संदेश भेजा है। इसमें उनसे माफी मांगी गई है। साथ उनसे संस्थान में आकर वहां अनुसंधान कार्य में शामिल होने का आग्रह किया गया है। इस संदेश की कॉपी को रूसी रिसर्चर के एक दोस्त ने ट्विटर पर पोस्ट किया है।

इसके पहले जब ऑफर वापस लिया गया था, तब भेजे गए संदेश में संस्थान के एक पदाधिकारी ने लिखा था- ‘मुझे बताया गया है कि हाल में बीटसन इंस्टीट्यूट ने एक नई नीति अपनाई है। उसके तहत मैं आपको नियुक्त करने में असमर्थ हूं, क्योंकि आप रूसी हैं। मुझे इसका अफसोस है और मैं मानता हूं कि यह अनुचित है। लेकिन रूस में जो हो रहा है, उससे आप जैसे युवा वैज्ञानिकों पर बहुत खराब असर पड़ेगा। मैं उम्मीद करता हूं कि भविष्य में मैं आपके लिए पीएचडी कोर्स में स्थान ढूंढ पाऊंगा।’

गुरुवार को जारी एक बयान में बीटसन इंस्टीट्यूट ने सफाई दी कि उसकी ऐसी कोई नीति नहीं है, जिसके तहत रूसी छात्रों की अर्जी को सिर्फ उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर ठुकरा दिया जाए। बयान में कहा गया- ‘इस मामले में कुछ शुरुआती गलतफहमी हुई, जिसका हल अब निकाल लिया गया है। हमने संबंधित आवेदक से संपर्क किया है, और उन्हें पीएचडी कोर्स में जगह देने की पेशकश की है। उन्हें जो तकलीफ पहुंची, उसके लिए हमने माफी भी मांगी है। हम पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि भविष्य में फिर ऐसी घटना ना दोहराई जाए।’

इसके पहले ऐसी ही एक घटना पिछले मई में यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट लंदन में हुई थी। तब हॉस्पिलिटी कोर्स के लिए आए एक रूसी महिला के आवेदन को ठुकरा दिया गया था। उस महिला को भेजे गए ई-मेल में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूनिवर्सिटी में अपनाई गई नई नीति का हवाला दिया गया था। लेकिन फिर बाद यूनिवर्सिटी ने सफाई दी थी कि ‘आंतरिक गलतफहमी’ के कारण ‘गलती से’ वो ई-मेल चला गया।

विस्तार

ब्रिटेन के रिसर्च संस्थान ने रूस की एक युवा शोधकर्ता से माफी मांगी है। कुछ महीने पहले इसी संस्थान ने उस रिसर्चर को अपने यहां दाखिला देने का ऑफर वापस ले लिया था। ऑफर वापस लेते हुए संस्थान ने कहा था कि चूंकि वह रूसी है, इसलिए उसे इस संस्थान में दाखिला नहीं मिल सकता। अब संस्थान ने उस वैज्ञानिक से माफी मांगते हुए उन्हें फिर से अपने यहां ज्वाइन करने के लिए आमंत्रित किया है।

ग्लासगो शहर में स्थित जीवन विज्ञान अनुसंधान संस्थान द बीटसन इंट्स्टीट्यूट ब्रिटेन से सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में एक है। यह संस्थान में कैंसर संबंधी अपने अनुसंधान के लिए मशहूर है। जब ये खबर सामने आई कि इस संस्थान ने एक रिसर्चर को दिया गया ऑफर सिर्फ उसकी राष्ट्रीयता यानी उसके रूसी होने के आधार पर वापस ले लिया, तो उसकी बड़े पैमाने पर निंदा हुई। रूसी शोधकर्ता ने इस संस्थान के पीएचडी कोर्स में दाखिला लेने के लिए अर्जी दी थी, जिसे स्वीकार करने के बाद संस्थान ने ठुकरा दिया था।

चौतरफा आलोचना के बाद संस्थान के एक सदस्य ने रूसी वैज्ञानिक को संदेश भेजा है। इसमें उनसे माफी मांगी गई है। साथ उनसे संस्थान में आकर वहां अनुसंधान कार्य में शामिल होने का आग्रह किया गया है। इस संदेश की कॉपी को रूसी रिसर्चर के एक दोस्त ने ट्विटर पर पोस्ट किया है।

इसके पहले जब ऑफर वापस लिया गया था, तब भेजे गए संदेश में संस्थान के एक पदाधिकारी ने लिखा था- ‘मुझे बताया गया है कि हाल में बीटसन इंस्टीट्यूट ने एक नई नीति अपनाई है। उसके तहत मैं आपको नियुक्त करने में असमर्थ हूं, क्योंकि आप रूसी हैं। मुझे इसका अफसोस है और मैं मानता हूं कि यह अनुचित है। लेकिन रूस में जो हो रहा है, उससे आप जैसे युवा वैज्ञानिकों पर बहुत खराब असर पड़ेगा। मैं उम्मीद करता हूं कि भविष्य में मैं आपके लिए पीएचडी कोर्स में स्थान ढूंढ पाऊंगा।’

गुरुवार को जारी एक बयान में बीटसन इंस्टीट्यूट ने सफाई दी कि उसकी ऐसी कोई नीति नहीं है, जिसके तहत रूसी छात्रों की अर्जी को सिर्फ उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर ठुकरा दिया जाए। बयान में कहा गया- ‘इस मामले में कुछ शुरुआती गलतफहमी हुई, जिसका हल अब निकाल लिया गया है। हमने संबंधित आवेदक से संपर्क किया है, और उन्हें पीएचडी कोर्स में जगह देने की पेशकश की है। उन्हें जो तकलीफ पहुंची, उसके लिए हमने माफी भी मांगी है। हम पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि भविष्य में फिर ऐसी घटना ना दोहराई जाए।’

इसके पहले ऐसी ही एक घटना पिछले मई में यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट लंदन में हुई थी। तब हॉस्पिलिटी कोर्स के लिए आए एक रूसी महिला के आवेदन को ठुकरा दिया गया था। उस महिला को भेजे गए ई-मेल में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूनिवर्सिटी में अपनाई गई नई नीति का हवाला दिया गया था। लेकिन फिर बाद यूनिवर्सिटी ने सफाई दी थी कि ‘आंतरिक गलतफहमी’ के कारण ‘गलती से’ वो ई-मेल चला गया।



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