एकतरफा प्रेम में किशोरी की हत्या का मामला: 15 साल पुराने मामले में मिली सजा, आजीवन कारावास और अर्थदंड भी


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उरई जिले में एकतरफा प्रेम में किशोरी की चाकुओं से गोदकर हत्या करने के दोषी को स्पेशल जज एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम शिवकुमार की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 42 हजार रुपये अर्थदंड भी दिया है। मामला 15 साल पुराना है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला इंदिरानगर (तुफैलपुरवा) निवासी महिला आशा देवी ने पुलिस को तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि उसकी 16 वर्षीय बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। 17 जनवरी 2007 को वह बेटी प्रीति को छोड़ने के लिए स्कूल जा रही थी।
तभी रास्ते में काली मंदिर के पास एकतरफा प्रेम के चलते मोहल्ले का गुडडू उर्फ हलीम, सईम और फईम ने रोक लिया। विरोध किया तो उन लोगों ने चाकुओं से वार कर दिया। इसमें प्रीति की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

शोरगुल सुनकर मोहल्ले के ही प्रमोद, कौशल, राजेंद्र आदि ने गुड्डू को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता हृदेश कुमार पांडेय ने बताया कि इस मामले के दो आरोपी सईम और फईम का मामला दूसरी फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला।

गुड्डू उर्फ हलीम का मामला स्पेशल जज एससी/एसटी अत्याचार निवारण एक्ट शिवकुमार की अदालत में चल रहा था। सजा सुनाने के बाद दोषी को पुलिस सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।

काम न आया नाबालिग होने का बहाना
सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि दोषी गुड्डू उर्फ हलीम ने सजा से बचने के लिए अपने आप को नाबालिग घोषित करने की कोशिश की। इस पर उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड ललितपुर स्थानांतरित कर दिया।

हालांकि किशोर न्याय बोर्ड ने 27 जुलाई 2022 को निर्णय में पाया कि गुड्डू उर्फ हलीम घटना के समय नाबालिग नहीं था। इस पर गुड्डू की पत्रावली एससी/एसटी कोर्ट में भेज दी गई। बुधवार को उसेएससी/एसटी कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।

विस्तार

उरई जिले में एकतरफा प्रेम में किशोरी की चाकुओं से गोदकर हत्या करने के दोषी को स्पेशल जज एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम शिवकुमार की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 42 हजार रुपये अर्थदंड भी दिया है। मामला 15 साल पुराना है।

शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला इंदिरानगर (तुफैलपुरवा) निवासी महिला आशा देवी ने पुलिस को तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि उसकी 16 वर्षीय बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। 17 जनवरी 2007 को वह बेटी प्रीति को छोड़ने के लिए स्कूल जा रही थी।

तभी रास्ते में काली मंदिर के पास एकतरफा प्रेम के चलते मोहल्ले का गुडडू उर्फ हलीम, सईम और फईम ने रोक लिया। विरोध किया तो उन लोगों ने चाकुओं से वार कर दिया। इसमें प्रीति की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि वह गंभीर रूप से घायल हो गई।



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