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साइंटिफिक रिसर्च पेपर प्रकाशन के मामले में अब नंबर वन बन गया चीन

ByNews Desk

Aug 13, 2022


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वैज्ञानिक रिसर्च पेपर प्रकाशित करने के मामले में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। रिसर्च पेपर्स की संख्या और पेपर्स की गुणवत्ता- दोनों मामलों में वह आगे निकल गया है। किसी साइंटिफिक रिसर्च पेपर का दूसरी जगहों पर हुए रिसर्च में कितना उद्धरण दिया जाता है, इस आधार पर उसकी गुणवत्ता तय की जाती है। एक ताजा विश्लेषण के मुताबिक इन दोनों मामलों में अब चीन की बढ़त हो गई है। इसका परिणाम आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत में चीन की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।

जापान की सरकारी संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने 2018 से 2021 तक दुनिया भर में प्रकाशित हुए रिसर्च पेपर्स के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक दुनिया में प्रकाशित हुए कुल रिसर्च पेपर्स के बीच जिन पेपर्स का सबसे ज्यादा बार हवाला दिया गया, उनमें चीन के प्रकाशित पेपर्स का हिस्सा 27.2 फीसदी रहा। वहां इस दौरान ऐसे 4,744 पेपर्स प्रकाशित हुए। इसी अवधि में अमेरिका में इस तरह के 4,330 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। इस तरह अमेरिकी रिसर्च पेपर्स का हिस्सा 24.9 फीसदी रहा। गुणवत्ता की कसौटी पर ब्रिटेन में प्रकाशित रिसर्च पेपर्स का हिस्सा सिर्फ 5.5 फीसदी रहा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने ये रिपोर्ट रिसर्च एनालिटिक्स कंपनी क्लेरिवेट के आंकड़ों के आधार पर तैयार की है। इस रिपोर्ट को इसी हफ्ते मंगलवार को जारी किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक रिसर्च को उद्योग जगत और अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का आधार समझा जाता है। अच्छी गुणवत्ता के रिसर्च पेपर्स किसी देश के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करते हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि आने वाला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अन्य अति आधुनिक तकनीकों का होगा। इन तकनीकों में चीन की क्षमता में खास बढ़ोतरी हुई है।

जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के वर्षों में उन्नत रिसर्च प्रकाशित करने के मामले में चीन ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। 2020 में प्रकाशित कुल रिसर्च पेपर्स की संख्या के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया था। 2021 में वह गुणवत्ता वाले पेपर्स के मामले में भी आगे निकल गया। 2019 में चीन में कुल 4,07,181 साइंटिफिक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। उस वर्ष अमेरिका में ये संख्या 2,93,434 रही।

जापान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्थित एशिया एंड पैसिफिक रिसर्च सेंटर के उप महानिदेशक शिनिची कुरोकी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा- ‘अब संख्या और गुणवत्ता दोनों ही लिहाज से साइंटिफिक रिसर्च पेपर प्रकाशित करने के मामले में चीन सर्वोच्च देशों में शामिल हो गया है। इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बने रहने के लिए यह जरूरी होगा कि वह अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त रिसर्च जारी रखे।’

इस रिपोर्ट से सामने आया है कि वैज्ञानिक अनुसंधान के मामले में जापान पिछड़ता चला जा रहा है। कुल प्रकाशित पेपर्स के मामले में उसका दर्ज पांचवां रहा। जबकि गुणवत्ता वाले पेपर्स के मामले में वह दसवें स्थान पर चला गया। स्पेन, दक्षिण कोरिया और भारत अब उससे आगे निकल गए हैं।

विस्तार

वैज्ञानिक रिसर्च पेपर प्रकाशित करने के मामले में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। रिसर्च पेपर्स की संख्या और पेपर्स की गुणवत्ता- दोनों मामलों में वह आगे निकल गया है। किसी साइंटिफिक रिसर्च पेपर का दूसरी जगहों पर हुए रिसर्च में कितना उद्धरण दिया जाता है, इस आधार पर उसकी गुणवत्ता तय की जाती है। एक ताजा विश्लेषण के मुताबिक इन दोनों मामलों में अब चीन की बढ़त हो गई है। इसका परिणाम आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत में चीन की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।

जापान की सरकारी संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने 2018 से 2021 तक दुनिया भर में प्रकाशित हुए रिसर्च पेपर्स के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक दुनिया में प्रकाशित हुए कुल रिसर्च पेपर्स के बीच जिन पेपर्स का सबसे ज्यादा बार हवाला दिया गया, उनमें चीन के प्रकाशित पेपर्स का हिस्सा 27.2 फीसदी रहा। वहां इस दौरान ऐसे 4,744 पेपर्स प्रकाशित हुए। इसी अवधि में अमेरिका में इस तरह के 4,330 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। इस तरह अमेरिकी रिसर्च पेपर्स का हिस्सा 24.9 फीसदी रहा। गुणवत्ता की कसौटी पर ब्रिटेन में प्रकाशित रिसर्च पेपर्स का हिस्सा सिर्फ 5.5 फीसदी रहा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने ये रिपोर्ट रिसर्च एनालिटिक्स कंपनी क्लेरिवेट के आंकड़ों के आधार पर तैयार की है। इस रिपोर्ट को इसी हफ्ते मंगलवार को जारी किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक रिसर्च को उद्योग जगत और अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का आधार समझा जाता है। अच्छी गुणवत्ता के रिसर्च पेपर्स किसी देश के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करते हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि आने वाला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अन्य अति आधुनिक तकनीकों का होगा। इन तकनीकों में चीन की क्षमता में खास बढ़ोतरी हुई है।

जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के वर्षों में उन्नत रिसर्च प्रकाशित करने के मामले में चीन ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। 2020 में प्रकाशित कुल रिसर्च पेपर्स की संख्या के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया था। 2021 में वह गुणवत्ता वाले पेपर्स के मामले में भी आगे निकल गया। 2019 में चीन में कुल 4,07,181 साइंटिफिक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। उस वर्ष अमेरिका में ये संख्या 2,93,434 रही।

जापान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्थित एशिया एंड पैसिफिक रिसर्च सेंटर के उप महानिदेशक शिनिची कुरोकी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा- ‘अब संख्या और गुणवत्ता दोनों ही लिहाज से साइंटिफिक रिसर्च पेपर प्रकाशित करने के मामले में चीन सर्वोच्च देशों में शामिल हो गया है। इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बने रहने के लिए यह जरूरी होगा कि वह अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त रिसर्च जारी रखे।’

इस रिपोर्ट से सामने आया है कि वैज्ञानिक अनुसंधान के मामले में जापान पिछड़ता चला जा रहा है। कुल प्रकाशित पेपर्स के मामले में उसका दर्ज पांचवां रहा। जबकि गुणवत्ता वाले पेपर्स के मामले में वह दसवें स्थान पर चला गया। स्पेन, दक्षिण कोरिया और भारत अब उससे आगे निकल गए हैं।



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