चीन ने ब्याज दर घटा कर दुनिया की चिंता बढ़ाई, लेकिन फिलहाल डॉलर को फायदा


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चीन में बढ़ रही आर्थिक मुश्किलों का सीधा फायदा फिलहाल अमेरिकी मुद्रा डॉलर को मिल रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था संबंधी आए तमाम नए आंकड़े निराशानजक रहे हैँ। इसे देखते हुए चीन ने अपने यहां ब्याज दर में कटौती की है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार के संचालकों को हैरत हुई है। जिस समय पूरी दुनिया में ट्रेंड ब्याज दर में बढ़ोतरी का है, चीन ने उलटा कदम उठाया है। 
चीन में औद्योगिक उत्पादन, खुदरा बिक्री, और निश्चित-संपत्ति निवेश (फिक्स्ड-असेट इन्वेस्टमेंट) के नए आंकड़े सोमवार को जारी हुए। ये तमाम आंकड़े अपेक्षा से नीचे रहे। इससे संकेत मिला कि चीनी अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ रहा है। इस खबर से दुनिया भर में पहले से मंडरा रही मंदी की आशंका और सघन हो गई है। इसी बीच ही चीन के सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने ब्याज दर में कटौती की घोषणा की है
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जानकारों के मुताबिक चीन को जीरो कोविड नीति की महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। देश में अभी भी जगह-जगह कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैँ। उन जगहों पर चीनी अधिकारी सख्त प्रतिबंध लागू कर देते हैं। उसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसका साफ असर औद्योगिक उत्पादन, खुदरा बिक्री और पूंजी निवेश पर पड़ा है।

स्विसकोट नाम की मार्केट एजेंसी में रणनीतिकार इपेक ओज्कारदेस्काया ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी से बातचीत में कहा- ‘निश्चित रूप से चीन में सामने आए खराब आंकड़ों का असर बाकी दुनिया में जारी मंदी संबंधी चिंताओं पर महसूस किया गया है।’ उन्होंने बताया कि मंदी की आशंका गहराने के कारण निवेशकों में डॉलर में निवेश का रुझान और तेज हुआ है। इसका खराब असर युआन और यूरो पर देखने को मिला है। 

बीते महीनों में अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दर बढ़ाने की नीति पर आगे बढ़ा है। फेडरल रिजर्व ने ये नीति महंगाई पर काबू पाने के लिए अपनाई, लेकिन उस कारण डॉलर में निवेश करना अधिक फायदेमंद हो गया है। निवेशकों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व अभी ब्याज दर बढ़ाना जारी रखेगा। इन्वेस्टेमेंट एजेंसी रिचमॉन्ड फेड के अध्यक्ष थॉमस बार्किन ने बीते हफ्ते कहा था कि फेडरल रिजर्व का यह रुख शायद तब तक जारी रहेगा, जब तक महंगाई दर घट कर दो फीसदी पर नहीं आ जाती है। फिलहाल, ये दर आठ प्रतिशत से ऊपर है। 

मिजुहो बैंक में निवेश रणनीतिकार केन चेउंग ने सीएनबीसी को बताया- ‘कोविड के फैलने और प्रोपर्टी सेक्टर के ढहने से चीनी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बना हुआ है। इसीलिए महंगाई और बाजार में नकदी की अत्यधिक उपलब्धता संबंधी चेतावनियों के बावजूद पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने ब्याज दर में कटौती की है। उसका मकसद देश में मांग को बढ़ाना है।’ 

जानकारों के मुताबिक इस कदम की वजह से निवेशकों ने युवान से हट कर डॉलर में निवेश शुरू कर दिया है। लेकिन इसका ट्रेंड की मार यूरो समेत दूसरी मुद्राओं पर भी पड़ने का अंदेशा है। विश्लेषकों ने कहा है कि दुनिया भर के वित्तीय और मौद्रिक बाजारों में पहले से ही उथल-पुथल का दौर है। अब चीन के ताजा कदम ने बाजार को एक नया झटका दे दिया है। 

विस्तार

चीन में बढ़ रही आर्थिक मुश्किलों का सीधा फायदा फिलहाल अमेरिकी मुद्रा डॉलर को मिल रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था संबंधी आए तमाम नए आंकड़े निराशानजक रहे हैँ। इसे देखते हुए चीन ने अपने यहां ब्याज दर में कटौती की है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार के संचालकों को हैरत हुई है। जिस समय पूरी दुनिया में ट्रेंड ब्याज दर में बढ़ोतरी का है, चीन ने उलटा कदम उठाया है। 

चीन में औद्योगिक उत्पादन, खुदरा बिक्री, और निश्चित-संपत्ति निवेश (फिक्स्ड-असेट इन्वेस्टमेंट) के नए आंकड़े सोमवार को जारी हुए। ये तमाम आंकड़े अपेक्षा से नीचे रहे। इससे संकेत मिला कि चीनी अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ रहा है। इस खबर से दुनिया भर में पहले से मंडरा रही मंदी की आशंका और सघन हो गई है। इसी बीच ही चीन के सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने ब्याज दर में कटौती की घोषणा की है

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जानकारों के मुताबिक चीन को जीरो कोविड नीति की महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। देश में अभी भी जगह-जगह कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैँ। उन जगहों पर चीनी अधिकारी सख्त प्रतिबंध लागू कर देते हैं। उसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसका साफ असर औद्योगिक उत्पादन, खुदरा बिक्री और पूंजी निवेश पर पड़ा है।

स्विसकोट नाम की मार्केट एजेंसी में रणनीतिकार इपेक ओज्कारदेस्काया ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी से बातचीत में कहा- ‘निश्चित रूप से चीन में सामने आए खराब आंकड़ों का असर बाकी दुनिया में जारी मंदी संबंधी चिंताओं पर महसूस किया गया है।’ उन्होंने बताया कि मंदी की आशंका गहराने के कारण निवेशकों में डॉलर में निवेश का रुझान और तेज हुआ है। इसका खराब असर युआन और यूरो पर देखने को मिला है। 

बीते महीनों में अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दर बढ़ाने की नीति पर आगे बढ़ा है। फेडरल रिजर्व ने ये नीति महंगाई पर काबू पाने के लिए अपनाई, लेकिन उस कारण डॉलर में निवेश करना अधिक फायदेमंद हो गया है। निवेशकों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व अभी ब्याज दर बढ़ाना जारी रखेगा। इन्वेस्टेमेंट एजेंसी रिचमॉन्ड फेड के अध्यक्ष थॉमस बार्किन ने बीते हफ्ते कहा था कि फेडरल रिजर्व का यह रुख शायद तब तक जारी रहेगा, जब तक महंगाई दर घट कर दो फीसदी पर नहीं आ जाती है। फिलहाल, ये दर आठ प्रतिशत से ऊपर है। 

मिजुहो बैंक में निवेश रणनीतिकार केन चेउंग ने सीएनबीसी को बताया- ‘कोविड के फैलने और प्रोपर्टी सेक्टर के ढहने से चीनी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बना हुआ है। इसीलिए महंगाई और बाजार में नकदी की अत्यधिक उपलब्धता संबंधी चेतावनियों के बावजूद पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने ब्याज दर में कटौती की है। उसका मकसद देश में मांग को बढ़ाना है।’ 

जानकारों के मुताबिक इस कदम की वजह से निवेशकों ने युवान से हट कर डॉलर में निवेश शुरू कर दिया है। लेकिन इसका ट्रेंड की मार यूरो समेत दूसरी मुद्राओं पर भी पड़ने का अंदेशा है। विश्लेषकों ने कहा है कि दुनिया भर के वित्तीय और मौद्रिक बाजारों में पहले से ही उथल-पुथल का दौर है। अब चीन के ताजा कदम ने बाजार को एक नया झटका दे दिया है। 



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