चीन के तेवरों से अंदेशा- ताइवान के पास आम बात हो जाएगा उसका सैनिक अभ्यास


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ताइवान के आसपास चीन के जारी सैनिक अभ्यास को ताइवान को खुद में मिला लेने की चीनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पहले चीन ने चार दिन के लिए ये अभ्यास शुरू किया। लेकिन रविवार को ये अवधि पूरी होने के बाद उसने इसे बढ़ाने का एलान किया। खबरों के मुताबिक अब 17 अगस्त तक ये अभ्यास चलेगा। इसका मतलब यह समझा गया है कि वहां अभ्यास को चीन एक सामान्य बात बना देना चाहता है।

चीन ने सैनिक अभ्यास अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के विरोध में शुरू किया। इस दौरान चीन ने ताइवान के जल और वायु क्षेत्रों में उस जगह जाकर सैनिक अभ्यास कर रहा है, जहां अब तक वह नहीं जाता था। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने चीन की इस कार्रवाई को ‘भड़ाकाऊ’ और ‘गैर जिम्मेदाराना’ बताया है। उधर ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि उसकी सशस्त्र सेनाएं स्थिति पर नजर बनाए रखेंगी और जब जरूरत होगा उसके लड़ाकू विमान, नौसैनिक वाहन और मिसाइल प्रणालियां जवाब देंगी।

थिंक टैंक क्राइसिस ग्रुप में विश्लेषक अमानदा सियाओ के मुताबिक चीनी अभ्यास का मकसद अमेरिका और ताइवान के शासकों को प्रभावित करना है। वह संदेश देना चाहता है कि ताइवान के एकीकरण की कोशिश उसकी कोशिश के खिलाफ वे कोई कदम ना उठाएं। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘चीन एक न्यू नॉर्मल (सामान्य स्थिति) बनाना चाहता है। बड़े पैमाने पर चीनी जहाजों और विमानों का मेडियन लाइन को पार करना महत्त्वपूर्ण और नई बात है। घोषित तौर पर सैनिक अभ्यास खत्म हो जाने के बाद भी ऐसा जारी रहेगा। यह चीन का उस क्षेत्र में अपनी सैनिक उपस्थिति को नियमित करने देने की कोशिश का हिस्सा है।’

चीन ने सभी विदेशी जहाजों और विमानों से कहा है कि इस अभ्यास के दौरान वह घोषित अभ्यास क्षेत्र से दूर रहें। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक ये एलान एक तरह से ताइवान की घेराबंदी है। ताइवान के पूर्व सैनिक इनोच वू के मुताबिक इस सैनिक अभ्यास ने इस पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। इससे यहां व्यापार और यात्राओं में रुकावट आई है। उन्होंने कहा- ‘ये अनुचित कार्य उतना ही आर्थिक जोर-जबरदस्ती हैं, जितना ये धमकाने की कोशिश हैं। यह ताइवान पर हमला बढ़ाने के चीनी तौर-तरीकों का हिस्सा हैं।’

चालीस साल तक नौसेना में काम कर चुके ताइवान के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल ली सी-मिन के मुताबिक अब यह देखने की बात होगी कि इस तरह यहां सैनिक अभ्यास को सामान्य बात बना देना क्या अमेरिका-ताइवान और चीन के रिश्तों में एक पहलू बनता है। उन्होंने कहा- ‘मिसाइल दागना और सैनिक अभ्यास ताइवान से जोर-जबरदस्ती करने का हिस्सा है। उनका मकसद यहां घेरेबंदी करना नहीं है। इस अभ्यास के जरिए चीन यह दिखाना चाहता है कि ताइवान के चारों तरफ उसका पूरा नियंत्रण है।’

ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने कहा है कि ताइवान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करेगा। उन्होंने एक ताजा बयान में कहा है- ‘हम शांत और विवेकशील हैं। हम बेसब्र और भड़काऊ नहीं हैं। लेकिन यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि ताइवान चुनौतियों के आगे नहीं झुकेगा।’

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ताइवान के आसपास चीन के जारी सैनिक अभ्यास को ताइवान को खुद में मिला लेने की चीनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पहले चीन ने चार दिन के लिए ये अभ्यास शुरू किया। लेकिन रविवार को ये अवधि पूरी होने के बाद उसने इसे बढ़ाने का एलान किया। खबरों के मुताबिक अब 17 अगस्त तक ये अभ्यास चलेगा। इसका मतलब यह समझा गया है कि वहां अभ्यास को चीन एक सामान्य बात बना देना चाहता है।

चीन ने सैनिक अभ्यास अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के विरोध में शुरू किया। इस दौरान चीन ने ताइवान के जल और वायु क्षेत्रों में उस जगह जाकर सैनिक अभ्यास कर रहा है, जहां अब तक वह नहीं जाता था। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने चीन की इस कार्रवाई को ‘भड़ाकाऊ’ और ‘गैर जिम्मेदाराना’ बताया है। उधर ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि उसकी सशस्त्र सेनाएं स्थिति पर नजर बनाए रखेंगी और जब जरूरत होगा उसके लड़ाकू विमान, नौसैनिक वाहन और मिसाइल प्रणालियां जवाब देंगी।

थिंक टैंक क्राइसिस ग्रुप में विश्लेषक अमानदा सियाओ के मुताबिक चीनी अभ्यास का मकसद अमेरिका और ताइवान के शासकों को प्रभावित करना है। वह संदेश देना चाहता है कि ताइवान के एकीकरण की कोशिश उसकी कोशिश के खिलाफ वे कोई कदम ना उठाएं। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘चीन एक न्यू नॉर्मल (सामान्य स्थिति) बनाना चाहता है। बड़े पैमाने पर चीनी जहाजों और विमानों का मेडियन लाइन को पार करना महत्त्वपूर्ण और नई बात है। घोषित तौर पर सैनिक अभ्यास खत्म हो जाने के बाद भी ऐसा जारी रहेगा। यह चीन का उस क्षेत्र में अपनी सैनिक उपस्थिति को नियमित करने देने की कोशिश का हिस्सा है।’

चीन ने सभी विदेशी जहाजों और विमानों से कहा है कि इस अभ्यास के दौरान वह घोषित अभ्यास क्षेत्र से दूर रहें। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक ये एलान एक तरह से ताइवान की घेराबंदी है। ताइवान के पूर्व सैनिक इनोच वू के मुताबिक इस सैनिक अभ्यास ने इस पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। इससे यहां व्यापार और यात्राओं में रुकावट आई है। उन्होंने कहा- ‘ये अनुचित कार्य उतना ही आर्थिक जोर-जबरदस्ती हैं, जितना ये धमकाने की कोशिश हैं। यह ताइवान पर हमला बढ़ाने के चीनी तौर-तरीकों का हिस्सा हैं।’

चालीस साल तक नौसेना में काम कर चुके ताइवान के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल ली सी-मिन के मुताबिक अब यह देखने की बात होगी कि इस तरह यहां सैनिक अभ्यास को सामान्य बात बना देना क्या अमेरिका-ताइवान और चीन के रिश्तों में एक पहलू बनता है। उन्होंने कहा- ‘मिसाइल दागना और सैनिक अभ्यास ताइवान से जोर-जबरदस्ती करने का हिस्सा है। उनका मकसद यहां घेरेबंदी करना नहीं है। इस अभ्यास के जरिए चीन यह दिखाना चाहता है कि ताइवान के चारों तरफ उसका पूरा नियंत्रण है।’

ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने कहा है कि ताइवान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करेगा। उन्होंने एक ताजा बयान में कहा है- ‘हम शांत और विवेकशील हैं। हम बेसब्र और भड़काऊ नहीं हैं। लेकिन यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि ताइवान चुनौतियों के आगे नहीं झुकेगा।’



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