मुक्केबाजी में निकहत-नीतू पर मैरीकॉम की विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती, लवलीना-जैस्मिन में भी क्षमता


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भारत में महिला मुक्केबाजी यानी मैरीकॉम। उनकी तुलना किसी अन्य खिलाड़ी से हो भी नहीं सकती। छह बार की विश्व चैंपियन, एशियाड, कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण विजेता और ओलंपिक का कांस्य पदक जीतने वालीं एमसी मैरीकॉम अपने आप में एक संस्था हैं। युवा मुक्केबाजों पर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। विश्व चैंपियन निकहत जरीन और उभरती स्टार नीतू घनघस में काफी प्रतिभा है। दोनों ही मुक्केबाजों ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में एकतरफा जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक जीते। निकहत अनुभवी होने के साथ ही तकनीकी रूप से मजबूत हैं।

निकहत लंबे समय से मुक्केबाजी कर रही हैं लेकिन उनको बड़ी सफलता इसी वर्ष मिली है। इस्तांबुल में हुई विश्व चैंपियनशिप उन्होंने स्वर्ण जीता। वह 50 किलो भारवर्ग में खेलती हैं। मैरीकॉम का भी भारवर्ग 48 से 51 रहा है। नीतू 48 भारवर्ग में खेलती हैं। उन्होंने इसी वर्ष इटली में हुए स्ट्रैंड्जा कप में स्वर्ण जीता था।

बीमार होने की वजह से विश्व वह चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में हार गई थीं लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में तो उनके खेल ने हर किसी को प्रभावित किया। क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तो उनकी प्रतिद्वंद्वी टिक ही नहीं सकीं। फाइनल में उन्होंने कोच की रणनीति के अनुसार खेला और स्वर्ण जीता। राष्ट्रमंडल खेलों में मैरीकॉम के बाद निकहत और नीतू ने ही स्वर्ण पदक जीते हैं।  

12 में से सात खिलाड़ियों ने जीते पदक, चार भारवर्ग में हिस्सा हीं नहीं लिया 
बर्मिंघम में भारत के आठ पुरुष और चार महिला मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था। इनमें से सात पदक जीतने में सफल रहे। महिलाओं में नीतू और निकहत ने स्वर्ण जीते तो जैस्मिन ने कांस्य जीता। वहीं, पुरुषों में अमित पंघाल ने स्वर्ण, सागर अहलावत ने रजत और मोहम्मद हसमुद्दीन व रोहित टोकस ने कांस्य जीते।

मुक्केबाजी में उत्तरी आयरलैंड (पांच स्वर्ण) के बाद भारत दूसरे स्थान पर रहा था। राष्ट्रमंडल में कुल 16 भारवर्ग में मुक्केबाजी स्पर्धा हुई थी, इनमें से चार भारवर्ग में भारत के खिलाड़ियों ने हिस्सा ही नहीं लिया था। यदि चार मुक्केबाज और होते तो पदक भी बढ़ सकते थे। 2018 गोल्ड कोस्ट में मुक्केबाजी में भारत ने तीन स्वर्ण सहित नौ पदक जीते थे।  

जितना ज्यादा रिंग में उतरेंगी, उतनी होंगी मजबूत
भारतीय महिला मुक्केबाजी के मुख्य कोच भास्कर भट ने कहा- मैरीकॉम की किसी से तुलना नहीं हो सकती। निकहत तकनीकी रूप से काफी मजबूत हैं। नीतू को अभी बहुत कुछ सीखना है। इनके अंदर काफी काबिलियत है। ये दोनों जितना ज्यादा रिंग में उतरेंगी, उतनी ही अधिक परिपक्व होंगी। जैस्मिन और लवलीना में भी काफी क्षमताएं हैं।

विस्तार

भारत में महिला मुक्केबाजी यानी मैरीकॉम। उनकी तुलना किसी अन्य खिलाड़ी से हो भी नहीं सकती। छह बार की विश्व चैंपियन, एशियाड, कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण विजेता और ओलंपिक का कांस्य पदक जीतने वालीं एमसी मैरीकॉम अपने आप में एक संस्था हैं। युवा मुक्केबाजों पर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। विश्व चैंपियन निकहत जरीन और उभरती स्टार नीतू घनघस में काफी प्रतिभा है। दोनों ही मुक्केबाजों ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में एकतरफा जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक जीते। निकहत अनुभवी होने के साथ ही तकनीकी रूप से मजबूत हैं।

निकहत लंबे समय से मुक्केबाजी कर रही हैं लेकिन उनको बड़ी सफलता इसी वर्ष मिली है। इस्तांबुल में हुई विश्व चैंपियनशिप उन्होंने स्वर्ण जीता। वह 50 किलो भारवर्ग में खेलती हैं। मैरीकॉम का भी भारवर्ग 48 से 51 रहा है। नीतू 48 भारवर्ग में खेलती हैं। उन्होंने इसी वर्ष इटली में हुए स्ट्रैंड्जा कप में स्वर्ण जीता था।

बीमार होने की वजह से विश्व वह चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में हार गई थीं लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में तो उनके खेल ने हर किसी को प्रभावित किया। क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तो उनकी प्रतिद्वंद्वी टिक ही नहीं सकीं। फाइनल में उन्होंने कोच की रणनीति के अनुसार खेला और स्वर्ण जीता। राष्ट्रमंडल खेलों में मैरीकॉम के बाद निकहत और नीतू ने ही स्वर्ण पदक जीते हैं।  

12 में से सात खिलाड़ियों ने जीते पदक, चार भारवर्ग में हिस्सा हीं नहीं लिया 

बर्मिंघम में भारत के आठ पुरुष और चार महिला मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था। इनमें से सात पदक जीतने में सफल रहे। महिलाओं में नीतू और निकहत ने स्वर्ण जीते तो जैस्मिन ने कांस्य जीता। वहीं, पुरुषों में अमित पंघाल ने स्वर्ण, सागर अहलावत ने रजत और मोहम्मद हसमुद्दीन व रोहित टोकस ने कांस्य जीते।

मुक्केबाजी में उत्तरी आयरलैंड (पांच स्वर्ण) के बाद भारत दूसरे स्थान पर रहा था। राष्ट्रमंडल में कुल 16 भारवर्ग में मुक्केबाजी स्पर्धा हुई थी, इनमें से चार भारवर्ग में भारत के खिलाड़ियों ने हिस्सा ही नहीं लिया था। यदि चार मुक्केबाज और होते तो पदक भी बढ़ सकते थे। 2018 गोल्ड कोस्ट में मुक्केबाजी में भारत ने तीन स्वर्ण सहित नौ पदक जीते थे।  

जितना ज्यादा रिंग में उतरेंगी, उतनी होंगी मजबूत

भारतीय महिला मुक्केबाजी के मुख्य कोच भास्कर भट ने कहा- मैरीकॉम की किसी से तुलना नहीं हो सकती। निकहत तकनीकी रूप से काफी मजबूत हैं। नीतू को अभी बहुत कुछ सीखना है। इनके अंदर काफी काबिलियत है। ये दोनों जितना ज्यादा रिंग में उतरेंगी, उतनी ही अधिक परिपक्व होंगी। जैस्मिन और लवलीना में भी काफी क्षमताएं हैं।



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