पंजाब के बाद गुजरात को विश्व बैंक से मिला 35 करोड़ डॉलर का कर्ज, स्वास्थ्य सेवाओं पर होगा खर्च


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विश्व बैंक ने गुजरात को 35 करोड़ डॉलर (2,832 करोड़ रुपये से अधिक) के कर्ज को मंजूरी दे दी है। इसका इस्तेमाल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इस राशि का फोकस बीमारी की निगरानी पर होगा।

विश्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि उसके कार्यकारी निदेशक मंडल ने गुजरात को 35 करोड़ डॉलर का कर्ज देने को हरी झंडी दे दी है। यह कर्ज विश्व बैंक की इकाई अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) देगा।

इससे पहले विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत के राज्य पंजाब को अपने वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने और सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की  पहुंच में सुधार करने में मदद करने के लिए 150 मिलियन अमरीकी डालर के ऋण को मंजूरी दी थी।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान ने अपने एक बयान में कहा था कि यह विभिन्न सरकारी विभागों की संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने, वित्तीय जोखिमों का प्रबंधन करने और सतत विकास का समर्थन करने  के लिए राज्य की ओर से किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करेगा। बयान में कहा गया कि पंजाब की ग्रोथ क्षमताओं के अनुरूप कम रही है। राजकोषीय चुनौतियों और संस्थागत क्षमता बाधाओं के संयोजन का मतलब है कि विकास की प्राथमिकताओं को पूरा करने में दुर्लभ संसाधनों की कमी है

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विश्व बैंक ने गुजरात को 35 करोड़ डॉलर (2,832 करोड़ रुपये से अधिक) के कर्ज को मंजूरी दे दी है। इसका इस्तेमाल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इस राशि का फोकस बीमारी की निगरानी पर होगा।

विश्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि उसके कार्यकारी निदेशक मंडल ने गुजरात को 35 करोड़ डॉलर का कर्ज देने को हरी झंडी दे दी है। यह कर्ज विश्व बैंक की इकाई अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) देगा।

इससे पहले विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत के राज्य पंजाब को अपने वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने और सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की  पहुंच में सुधार करने में मदद करने के लिए 150 मिलियन अमरीकी डालर के ऋण को मंजूरी दी थी।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान ने अपने एक बयान में कहा था कि यह विभिन्न सरकारी विभागों की संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने, वित्तीय जोखिमों का प्रबंधन करने और सतत विकास का समर्थन करने  के लिए राज्य की ओर से किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करेगा। बयान में कहा गया कि पंजाब की ग्रोथ क्षमताओं के अनुरूप कम रही है। राजकोषीय चुनौतियों और संस्थागत क्षमता बाधाओं के संयोजन का मतलब है कि विकास की प्राथमिकताओं को पूरा करने में दुर्लभ संसाधनों की कमी है



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