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इस्राइल की तकनीकी से फल और सब्जियां उगाएंगे किसान

ByNews Desk

Aug 11, 2022


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हमीरपुर। बुंदेलखंड के किसान इस्राइल की तकनीकी से सब्जी और फल की खेती कर आमदनी बढ़ाएंगे। उनका ये सपना कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) कुरारा और उद्यान विभाग के प्रयास से साकार होगा। पौथियों में दो करोड़ आठ लाख की लागत से दो मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजीटेबल लगाए जाएंगे। इनमें पौध तैयार कर किसानों को दी जाएगी।
जिला उद्यान अधिकारी रमेश पाठक ने बताया कि सेंटर की जगह तय कर प्रस्ताव शासन में प्रस्ताव भेज दिया गया है। अभी किसान फूल गोभी, पत्ता गोभी, ककड़ी, तरोई, लौकी व फल ( पपीता, केला) आदि की खेती सामान्य विधि से करते हैं। उन्हें बारिश व तेज धूप की वजह से पौध तैयार करने में परेशानियां आतीं हैं। पौध तैयारी के दौरान रोग भी लग जाते हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तैयार पौध में रोग नहीं लगेगा और उपज भी बेहतर होगी।
इनसेट
किसानों को इस तरह होगा फायदा
केवीके के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि किसानों किसान चाहें तो खुद बीज खरीदकर सेंटर में संपर्क कर सकते हैं। बीज देने पर एक रुपये और न देने पर दो रुपये में उन्हें पौध दी जाएगी। यहां तैयार पौध को खेत में लगाने से खाद, पानी की बचत होगी। 20 से 25 दिन का तैयार पौधा 45 से 55 दिन में फल देने लगेगा।
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कैसे तैयार होती है पौध
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि इस्रायल तकनीक से वर्मी कंपोस्ट और अन्य खादों को डालकर पौध तैयार की जाती है। जिससे इसमें मौसम का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। अगर फसल एक पिछड़ भी गई तो बीमारी रहित उच्च क्वालिटी की पौध उस गैप को पूरा कर देती है। जब किसान उसे लगाएगा तो समय से ही उत्पादन मिल सकेगा।

हमीरपुर। बुंदेलखंड के किसान इस्राइल की तकनीकी से सब्जी और फल की खेती कर आमदनी बढ़ाएंगे। उनका ये सपना कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) कुरारा और उद्यान विभाग के प्रयास से साकार होगा। पौथियों में दो करोड़ आठ लाख की लागत से दो मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजीटेबल लगाए जाएंगे। इनमें पौध तैयार कर किसानों को दी जाएगी।

जिला उद्यान अधिकारी रमेश पाठक ने बताया कि सेंटर की जगह तय कर प्रस्ताव शासन में प्रस्ताव भेज दिया गया है। अभी किसान फूल गोभी, पत्ता गोभी, ककड़ी, तरोई, लौकी व फल ( पपीता, केला) आदि की खेती सामान्य विधि से करते हैं। उन्हें बारिश व तेज धूप की वजह से पौध तैयार करने में परेशानियां आतीं हैं। पौध तैयारी के दौरान रोग भी लग जाते हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तैयार पौध में रोग नहीं लगेगा और उपज भी बेहतर होगी।

इनसेट

किसानों को इस तरह होगा फायदा

केवीके के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि किसानों किसान चाहें तो खुद बीज खरीदकर सेंटर में संपर्क कर सकते हैं। बीज देने पर एक रुपये और न देने पर दो रुपये में उन्हें पौध दी जाएगी। यहां तैयार पौध को खेत में लगाने से खाद, पानी की बचत होगी। 20 से 25 दिन का तैयार पौधा 45 से 55 दिन में फल देने लगेगा।

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कैसे तैयार होती है पौध

जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि इस्रायल तकनीक से वर्मी कंपोस्ट और अन्य खादों को डालकर पौध तैयार की जाती है। जिससे इसमें मौसम का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। अगर फसल एक पिछड़ भी गई तो बीमारी रहित उच्च क्वालिटी की पौध उस गैप को पूरा कर देती है। जब किसान उसे लगाएगा तो समय से ही उत्पादन मिल सकेगा।



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