Hamara Kasba I Hindi News I Bundelkhand News

विदेश नीति में रूस से दूरी बनाने में भारत को लगेगा लंबा समय, अमेरिका ने उठाए सवाल

ByNews Desk

Aug 19, 2022


ख़बर सुनें

अमेरिका ने दावा किया है कि भारत को उसकी विदेश नीति में रूस के प्रति झुकाव को घटाने और उससे दूरी बनाने में लंबा समय लगेगा। क्योंकि किसी का नजरिया बदलना स्विच दबाकर बत्ती बुझाने जैसा नहीं है।  

रूस से भारत के तेल व खाद निर्यात बढ़ाने और रूसी वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, किसी देश की विदेश नीति पर बोलना मेरा काम नहीं है। लेकिन हम वह जरूर बता सकते हैं जो भारत से हमें मालूम हुआ। 

हमने दुनियाभर के देशों को संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर रूस के आक्रामक रवैये के खिलाफ बोलते हुए सुना है। लेकिन भारत के परिदृश्य में हम यह समझते हैं कि नजरिया बदलना बिजली का बटन दबाने जैसा नहीं है। 

भारत को उसकी विदेश नीति में बदलाव करने व रूस के प्रति उसके झुकाव को घटाने में अभी लंबा वक्त लगेगा। रूस के साथ भारत के एतिहासिक रिश्ते रहे हैं। दशकों से ये दोनों देश के बीच दोस्ती रही है। अब इसमें कोई भी परिवर्तन आने में लंबा समय लगेगा। 

प्राइस ने कहा, हमने भारत के साथ द्विपक्षीय मुद्दों समेत क्वाड समूह में बहुत काम किया है। हमने पाया कि भारत राज्य की संप्रभुता के सिद्धांत का पूर्ण रूप से पालन व सम्मान करता है। रूस और चीन के युद्धाभ्यासों के सवाल पर प्राइस ने कहा, यह एक सतत प्रक्रिया है। अमेरिका के साथ भी बहुत सारे देश नियमित रूप से सैन्य अभ्यास करते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। 

प्राइस ने कहा, अब, व्यापक बिंदु यह है कि हमने पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) और रूस के बीच सुरक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में बढ़ते संबंध देखे हैं। हमने उदाहरण के लिए रूस और ईरान के बीच बढ़ते संबंध भी देखे। अमेरिका ने इसके सार्वजनिक तत्वों को भी सबके सामने रखा।

विस्तार

अमेरिका ने दावा किया है कि भारत को उसकी विदेश नीति में रूस के प्रति झुकाव को घटाने और उससे दूरी बनाने में लंबा समय लगेगा। क्योंकि किसी का नजरिया बदलना स्विच दबाकर बत्ती बुझाने जैसा नहीं है।  

रूस से भारत के तेल व खाद निर्यात बढ़ाने और रूसी वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, किसी देश की विदेश नीति पर बोलना मेरा काम नहीं है। लेकिन हम वह जरूर बता सकते हैं जो भारत से हमें मालूम हुआ। 

हमने दुनियाभर के देशों को संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर रूस के आक्रामक रवैये के खिलाफ बोलते हुए सुना है। लेकिन भारत के परिदृश्य में हम यह समझते हैं कि नजरिया बदलना बिजली का बटन दबाने जैसा नहीं है। 

भारत को उसकी विदेश नीति में बदलाव करने व रूस के प्रति उसके झुकाव को घटाने में अभी लंबा वक्त लगेगा। रूस के साथ भारत के एतिहासिक रिश्ते रहे हैं। दशकों से ये दोनों देश के बीच दोस्ती रही है। अब इसमें कोई भी परिवर्तन आने में लंबा समय लगेगा। 

प्राइस ने कहा, हमने भारत के साथ द्विपक्षीय मुद्दों समेत क्वाड समूह में बहुत काम किया है। हमने पाया कि भारत राज्य की संप्रभुता के सिद्धांत का पूर्ण रूप से पालन व सम्मान करता है। रूस और चीन के युद्धाभ्यासों के सवाल पर प्राइस ने कहा, यह एक सतत प्रक्रिया है। अमेरिका के साथ भी बहुत सारे देश नियमित रूप से सैन्य अभ्यास करते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। 

प्राइस ने कहा, अब, व्यापक बिंदु यह है कि हमने पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) और रूस के बीच सुरक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में बढ़ते संबंध देखे हैं। हमने उदाहरण के लिए रूस और ईरान के बीच बढ़ते संबंध भी देखे। अमेरिका ने इसके सार्वजनिक तत्वों को भी सबके सामने रखा।



Source link