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अमेरिकियों को अभी नहीं मिलने वाली है महंगाई से निजात, आसमान पर पहुंचे खाद्य पदार्थों के दाम

ByNews Desk

Aug 13, 2022


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जुलाई में मुद्रास्फीति दर में मामूली गिरावट के बावजूद अमेरिका को अभी महंगाई की समस्या से निजात मिलने की संभावना नहीं है। जुलाई के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद विशेषज्ञों ने ये बात कही है। जुलाई में अमेरिका में महंगाई की दर 8.5 फीसदी दर्ज हुई। जून में ये दर 9.1 फीसदी थी।

विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि मुद्रास्फीति दर अभी भी असाधारण रूप से ऊंची है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक- फेडरल रिजर्व की तरफ से स्वीकार्य मुद्रास्फीति दर की तय सीमा दो फीसदी है। जुलाई में ये दर उस सीमा से चारे चार गुना ज्यादा रही। इसका अर्थ है कि अमेरिका के लोगों को अभी भी ऊंची महंगाई दर का सामना करना पड़ रहा है।  

जुलाई में मुद्रास्फीति वृद्धि दर में गिरावट का प्रमुख कारण ईंधन के दाम का घटना रहा। खास कर अमेरिका में प्राकृतिक गैस की कीमत में कमी आई। विशेषज्ञों के मुताबिक जुलाई में कोर इन्फ्लेशन रेट (मुख्य मुद्रास्फीति दर) 5.9 फीसदी रही। कोर मुद्रास्फीति दर में ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों को शामिल नहीं किया जाता है। सबसे ज्यादा चिंता का संकेत यह उभरा है कि अमेरिका में श्रमिक उत्पादकता दर में गिरावट आ रही है। अर्थशास्त्री डेविड पी गोल्डमैन ने कहा है कि इसके परिणामस्वरूप अमेरिकावासियों को लंबे समय तक महंगाई का सामना करना पड़ेगा।

दरअसल गैस और कच्चे तेल के दाम में गिरावट अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक वृद्धि दर गिरने की आशंका के कारण आई है। अमेरिका के बारे में माना जा रहा है कि वहां मंदी की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में कारोबार जगत में तेल और गैस की खपत गिरने का अनुमान है। जुलाई में अमेरिका में गैस के दाम में 7.7 फीसदी की गिरावट आई। लेकिन जिस दाम पर गैस यहां मिल रही थी, वह 2021 के जुलाई तुलना में 44 फीसदी ऊंची थी।

टीवी चैनल सीएनएन के आर्थिक विश्लेषक राना फोरुहर ने कहा है कि खाद्य पदार्थों, आवास और बिजली पर होने वाले खर्च में गिरावट के संकेत नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि इन खर्चों में लोगों के पास कटौती करने का विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा- ‘बहुत से लोग छुट्टी मनाने, नई कार खरीदने, घरों में नया सामाना लाने आदि जैसे खर्चों में कटौती कर रहे हैं। मेरी राय में इस वजह से इन चीजों की मांग घटी है और उसका असर मुद्रास्फीति दर पर पड़ रहा है। लेकिन जिन चीजों में कटौती संभव नहीं है, उनकी महंगाई जारी है।’

खाद्य पदार्थो के दाम में वृद्धि जुलाई में भी जारी रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक किराना (ग्रॉसरी) इंडेक्स में जितनी बढ़ोतरी इस समय हुई है, उतना 1979 के बाद कभी नहीं देखा गया। आवास पर खर्च उससे भी बड़ी समस्या बनी हुई है। मकानों के दाम और किराये दोनों बहुत ऊंचे स्तर पर हैं। अर्थशास्त्रीय डेविड पी गोल्डमैन के मुताबिक सरकारी आंकड़ों में आवासीय महंगाई दर साढ़े छह फीसदी दिखाई गई है, जबकि रियल एस्टेट कारोबार पर नजर रखने वाली एक प्रतिष्ठित वेबसाइट पर जुलाई में ये वृद्धि 15 फीसदी से ऊंची रही। यानी आवास पर लोगों को उससे अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जितना सरकारी आंकड़ों में बताया गया है।

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जुलाई में मुद्रास्फीति दर में मामूली गिरावट के बावजूद अमेरिका को अभी महंगाई की समस्या से निजात मिलने की संभावना नहीं है। जुलाई के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद विशेषज्ञों ने ये बात कही है। जुलाई में अमेरिका में महंगाई की दर 8.5 फीसदी दर्ज हुई। जून में ये दर 9.1 फीसदी थी।

विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि मुद्रास्फीति दर अभी भी असाधारण रूप से ऊंची है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक- फेडरल रिजर्व की तरफ से स्वीकार्य मुद्रास्फीति दर की तय सीमा दो फीसदी है। जुलाई में ये दर उस सीमा से चारे चार गुना ज्यादा रही। इसका अर्थ है कि अमेरिका के लोगों को अभी भी ऊंची महंगाई दर का सामना करना पड़ रहा है।  

जुलाई में मुद्रास्फीति वृद्धि दर में गिरावट का प्रमुख कारण ईंधन के दाम का घटना रहा। खास कर अमेरिका में प्राकृतिक गैस की कीमत में कमी आई। विशेषज्ञों के मुताबिक जुलाई में कोर इन्फ्लेशन रेट (मुख्य मुद्रास्फीति दर) 5.9 फीसदी रही। कोर मुद्रास्फीति दर में ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों को शामिल नहीं किया जाता है। सबसे ज्यादा चिंता का संकेत यह उभरा है कि अमेरिका में श्रमिक उत्पादकता दर में गिरावट आ रही है। अर्थशास्त्री डेविड पी गोल्डमैन ने कहा है कि इसके परिणामस्वरूप अमेरिकावासियों को लंबे समय तक महंगाई का सामना करना पड़ेगा।

दरअसल गैस और कच्चे तेल के दाम में गिरावट अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक वृद्धि दर गिरने की आशंका के कारण आई है। अमेरिका के बारे में माना जा रहा है कि वहां मंदी की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में कारोबार जगत में तेल और गैस की खपत गिरने का अनुमान है। जुलाई में अमेरिका में गैस के दाम में 7.7 फीसदी की गिरावट आई। लेकिन जिस दाम पर गैस यहां मिल रही थी, वह 2021 के जुलाई तुलना में 44 फीसदी ऊंची थी।

टीवी चैनल सीएनएन के आर्थिक विश्लेषक राना फोरुहर ने कहा है कि खाद्य पदार्थों, आवास और बिजली पर होने वाले खर्च में गिरावट के संकेत नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि इन खर्चों में लोगों के पास कटौती करने का विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा- ‘बहुत से लोग छुट्टी मनाने, नई कार खरीदने, घरों में नया सामाना लाने आदि जैसे खर्चों में कटौती कर रहे हैं। मेरी राय में इस वजह से इन चीजों की मांग घटी है और उसका असर मुद्रास्फीति दर पर पड़ रहा है। लेकिन जिन चीजों में कटौती संभव नहीं है, उनकी महंगाई जारी है।’

खाद्य पदार्थो के दाम में वृद्धि जुलाई में भी जारी रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक किराना (ग्रॉसरी) इंडेक्स में जितनी बढ़ोतरी इस समय हुई है, उतना 1979 के बाद कभी नहीं देखा गया। आवास पर खर्च उससे भी बड़ी समस्या बनी हुई है। मकानों के दाम और किराये दोनों बहुत ऊंचे स्तर पर हैं। अर्थशास्त्रीय डेविड पी गोल्डमैन के मुताबिक सरकारी आंकड़ों में आवासीय महंगाई दर साढ़े छह फीसदी दिखाई गई है, जबकि रियल एस्टेट कारोबार पर नजर रखने वाली एक प्रतिष्ठित वेबसाइट पर जुलाई में ये वृद्धि 15 फीसदी से ऊंची रही। यानी आवास पर लोगों को उससे अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जितना सरकारी आंकड़ों में बताया गया है।



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