नए भारत के युवा आने वाली पीढ़ियों के लिए लिख रहे प्रेरणादायक कहानियां


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पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुनने से बड़ा सम्मान कोई नहीं: पीवी सिंधु
मुझे भारतीय होने का गर्व है, जैसा हर भारतीय महसूस करता है, वैसा ही। देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। 75वीं वर्षगांठ पर कहना चाहूंगी कि अब तक हमने बहुत कुछ हासिल किया है। खासतौर पर खेलों में। कई एथलीट सामने आ रहे हैं, जो देश की पहचान बन रहे हैं। यही उपलब्धियां हमें गर्व का अहसास कराती हैं। देश के लिए कुछ करना, मेडल पाना या कोई और भी उपलब्धि हासिल करना सभी का सपना होता है। मेरे लिए अपने खेल में जीत के बाद पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुनना वैसा ही क्षण है। इस दौरान आप जो महसूस करते हैं, शब्दों में कहना मुश्किल है, रोमांचित करने वाला क्षण होता है।

हारेंगे पर हार नहीं मानेंगे
लक्ष्य सामने हो तो मेहनत ही उद्देश्य होना चाहिए। बाधाएं व उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं। आपको पूरे दिल और ताकत से खेलना होता है। दिन खत्म होने पर पीछे देखें तो कोई भी मलाल न रहे। विश्वास है कि आप कुछ करके ही रहेंगे तो इतना काफी है। आप हार नहीं मान सकते। हार से लौटना, मजबूत बने रहना, खुद में विश्वास रखना, यही सबसे जरूरी है। 

मेहनत करते रहें, सही समय का इंतजार करें
ऐसा नहीं है कि आप हमेशा जीतेंगे। हमेशा हारेंगे भी नहीं। कुछ लोग कम उम्र में सफल हो जाते हैं, कुछ देर से, आपको सही समय का इंतजार करना है। हर दिन मेहनत करते हुए आप कुछ सीखते रहते हैं, बस खुद में विश्वास रखें।

पूरा देश साथ खड़ा होता है तो खुद को मैं अकेला महसूस नहीं करती: मीराबाई चानू
जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए सपने होना बहुत जरूरी है। सपना अपने लिए ही नहीं, देश के लिए भी होना चाहिए। आप देश के लिए कोई लक्ष्य चुनते हैं, तो पूरा देश आपके साथ खड़ा होता है। लोग आपकी सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं। असफलता पर भी कभी महसूस ही नहीं होता कि आप अकेले हैं। सपना पूरा करने के लिए धैर्य जरूरी है। यह मेहनत, समर्पण मांगते हैं। हम हर प्रतियोगिता में सर्वोत्तम देते हैं, लेकिन कभी-कभी मन के हिसाब से चीजें नहीं होतीं। तब निराश नहीं होना है। जीत के लिए कभी हार न मानना अनिवार्य शर्त है। हर सफल व्यक्ति चुनौतियों का सामना कर ही आगे बढ़ा है। चाहे खेल हो, पढ़ाई हो या कोई अन्य लक्ष्य हो। 

लोगों की अपेक्षाओं के दबाव में न आएं
देश का नाम जुड़ा होता है, तो अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं। आपसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होती है। इस दबाव को हावी नहीं होने देना है। अपना नैसर्गिक प्रदर्शन करना है। आपके गुरु ने जो सलाह दी है, सिर्फ उसे ही ध्यान में रखना है। हर क्षण उनसे सीखने को मिलता है। इनकी सलाह से लक्ष्य पर सौ फीसदी फोकस रख पाए तो सफलता तय है।

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है…
युवाओं से खासकर कहना है, सफलता शॉर्टकट से नहीं मिल सकती। कोई भी क्षेत्र हो, आपको लगातार अभ्यास करना होता है। बहुत मेहनत करनी होती है। व्यक्ति के परिश्रम के साथ उसके परिवार का सहारा भी बहुत जरूरी होता है।

ध्वज ऊपर जाता देख ऊंचा हो गया मस्तक: साक्षी मलिक
जीतने की प्रेरणा मुझे देशवासियों से मिलती है। कभी किसी मुकाबले में मैं पीछे चलने लगती हूं तो वे मेरा हौसला बढ़ाते हैं कि हार नहीं माननी, जीत कर ही आना है। मैं जो कमबैक कर पाई, उसके पीछे भी लोगों का प्यार और समर्थन है। मेडल पाते समय गर्व था…इतने बड़े स्टेज पर राष्ट्रगान, सबसे बड़ा खुशी का मौका होता है। इस बार अपना राष्ट्रीय ध्वज ऊपर चढ़ता दिखाई दिया, तो गर्व से मस्तक ऊंचा हो गया। लोगों के सपोर्ट और प्यार की इस वजह से खुद को भावुक होने से मैं नहीं रोक पाई।

नागरिक दिलाते हैं देश को महानता
कोई देश अपने नागरिकों के काम से महान बनाता है। मेरा यही लक्ष्य था कि दूसरे देश में जीत कर भारत का ध्वज लहराते देखना है। यही विश्वास हमारे मन में हर क्षेत्र के लिए होना चाहिए। कोई भी क्षेत्र हो, हमें वहां तिरंगा लहरा देना है। दूसरे देश के लोग आपका ध्वज चढ़ता देखते हैं तो सोचते हैं कि यहां के खिलाड़ी कितने तगड़े हैं, मजबूत हैं, यह देश कितना महान होगा।

युवा, जिम्मेदार हैं, देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। आप जो भी काम करें, मन लगाकर करें। जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। यह एक सफर है। बुरा समय चल रहा है तो हमेशा नहीं रहेगा। जोश-मेहनत कम न होने दें। हमारे युवा बेहद जिम्मेदार हैं। उनमें देश के लिए कुछ करने का जज्बा है। मौका आएगा तो वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुनने से बड़ा सम्मान कोई नहीं: पीवी सिंधु

मुझे भारतीय होने का गर्व है, जैसा हर भारतीय महसूस करता है, वैसा ही। देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। 75वीं वर्षगांठ पर कहना चाहूंगी कि अब तक हमने बहुत कुछ हासिल किया है। खासतौर पर खेलों में। कई एथलीट सामने आ रहे हैं, जो देश की पहचान बन रहे हैं। यही उपलब्धियां हमें गर्व का अहसास कराती हैं। देश के लिए कुछ करना, मेडल पाना या कोई और भी उपलब्धि हासिल करना सभी का सपना होता है। मेरे लिए अपने खेल में जीत के बाद पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुनना वैसा ही क्षण है। इस दौरान आप जो महसूस करते हैं, शब्दों में कहना मुश्किल है, रोमांचित करने वाला क्षण होता है।

हारेंगे पर हार नहीं मानेंगे

लक्ष्य सामने हो तो मेहनत ही उद्देश्य होना चाहिए। बाधाएं व उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं। आपको पूरे दिल और ताकत से खेलना होता है। दिन खत्म होने पर पीछे देखें तो कोई भी मलाल न रहे। विश्वास है कि आप कुछ करके ही रहेंगे तो इतना काफी है। आप हार नहीं मान सकते। हार से लौटना, मजबूत बने रहना, खुद में विश्वास रखना, यही सबसे जरूरी है। 

मेहनत करते रहें, सही समय का इंतजार करें

ऐसा नहीं है कि आप हमेशा जीतेंगे। हमेशा हारेंगे भी नहीं। कुछ लोग कम उम्र में सफल हो जाते हैं, कुछ देर से, आपको सही समय का इंतजार करना है। हर दिन मेहनत करते हुए आप कुछ सीखते रहते हैं, बस खुद में विश्वास रखें।

पूरा देश साथ खड़ा होता है तो खुद को मैं अकेला महसूस नहीं करती: मीराबाई चानू

जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए सपने होना बहुत जरूरी है। सपना अपने लिए ही नहीं, देश के लिए भी होना चाहिए। आप देश के लिए कोई लक्ष्य चुनते हैं, तो पूरा देश आपके साथ खड़ा होता है। लोग आपकी सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं। असफलता पर भी कभी महसूस ही नहीं होता कि आप अकेले हैं। सपना पूरा करने के लिए धैर्य जरूरी है। यह मेहनत, समर्पण मांगते हैं। हम हर प्रतियोगिता में सर्वोत्तम देते हैं, लेकिन कभी-कभी मन के हिसाब से चीजें नहीं होतीं। तब निराश नहीं होना है। जीत के लिए कभी हार न मानना अनिवार्य शर्त है। हर सफल व्यक्ति चुनौतियों का सामना कर ही आगे बढ़ा है। चाहे खेल हो, पढ़ाई हो या कोई अन्य लक्ष्य हो। 

लोगों की अपेक्षाओं के दबाव में न आएं

देश का नाम जुड़ा होता है, तो अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं। आपसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होती है। इस दबाव को हावी नहीं होने देना है। अपना नैसर्गिक प्रदर्शन करना है। आपके गुरु ने जो सलाह दी है, सिर्फ उसे ही ध्यान में रखना है। हर क्षण उनसे सीखने को मिलता है। इनकी सलाह से लक्ष्य पर सौ फीसदी फोकस रख पाए तो सफलता तय है।

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है…

युवाओं से खासकर कहना है, सफलता शॉर्टकट से नहीं मिल सकती। कोई भी क्षेत्र हो, आपको लगातार अभ्यास करना होता है। बहुत मेहनत करनी होती है। व्यक्ति के परिश्रम के साथ उसके परिवार का सहारा भी बहुत जरूरी होता है।

ध्वज ऊपर जाता देख ऊंचा हो गया मस्तक: साक्षी मलिक

जीतने की प्रेरणा मुझे देशवासियों से मिलती है। कभी किसी मुकाबले में मैं पीछे चलने लगती हूं तो वे मेरा हौसला बढ़ाते हैं कि हार नहीं माननी, जीत कर ही आना है। मैं जो कमबैक कर पाई, उसके पीछे भी लोगों का प्यार और समर्थन है। मेडल पाते समय गर्व था…इतने बड़े स्टेज पर राष्ट्रगान, सबसे बड़ा खुशी का मौका होता है। इस बार अपना राष्ट्रीय ध्वज ऊपर चढ़ता दिखाई दिया, तो गर्व से मस्तक ऊंचा हो गया। लोगों के सपोर्ट और प्यार की इस वजह से खुद को भावुक होने से मैं नहीं रोक पाई।

नागरिक दिलाते हैं देश को महानता

कोई देश अपने नागरिकों के काम से महान बनाता है। मेरा यही लक्ष्य था कि दूसरे देश में जीत कर भारत का ध्वज लहराते देखना है। यही विश्वास हमारे मन में हर क्षेत्र के लिए होना चाहिए। कोई भी क्षेत्र हो, हमें वहां तिरंगा लहरा देना है। दूसरे देश के लोग आपका ध्वज चढ़ता देखते हैं तो सोचते हैं कि यहां के खिलाड़ी कितने तगड़े हैं, मजबूत हैं, यह देश कितना महान होगा।

युवा, जिम्मेदार हैं, देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। आप जो भी काम करें, मन लगाकर करें। जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। यह एक सफर है। बुरा समय चल रहा है तो हमेशा नहीं रहेगा। जोश-मेहनत कम न होने दें। हमारे युवा बेहद जिम्मेदार हैं। उनमें देश के लिए कुछ करने का जज्बा है। मौका आएगा तो वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।



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