सातवीं मोहर्रम पर मेहंदी का जुलूस निकाला


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मुहम्मदाबाद। मोहर्रम की सात तारीख को हजरत हसन के पुत्र हजरत कासिम की याद में गांव में मेहंदी का जुलूस निकाला गया। इमाम चौक पर फातिहा पढ़कर अकीदतमंदों ने मुरादें मांगी।
मुहम्मदाबाद में शनिवार को देर रात मेहंदी और अलम का जुलूस श्रद्धाभाव के साथ निकाला गया। गांव के रहमानियां और इस्लाम क्लब अखाड़े के लोगों ने इमाम चौक से बड़ी मस्जिद के रास्ते से जुलूस निकाला।
आकर्षण का केंद्र रही नईम की मेहंदी
कोटरा।
दूधिया रंग की नईम की मेहंदी आकर्षण का केंद्र रही।
कस्बा कोटरा में मेहंदी का जुलूस पंच पीर से प्रारंभ होकर भान चौराहा, सब्जी मंडी, जामा मस्जिद होकर मुख्य चौक पर लाया गया। जुलूस में सबसे आगे ढोल बजाते हुए लोग चल रहे थे।
इसके पीछे चंदा की मेहंदी के साथ नईम, गालिब, अनीश के साथ सैकड़ों युवक हुसैन के नारे लगाते चल रहे थे। पीछे दूधिया रंग की आधुनिक ढंग से सजाई गई नईम की मेहंदी चल रही थी। इसके साथ नादिर बख्श, आरिफ, चांदबाबू की अगुवाई में मातमी नारे लगाते चल रहे थे। बड़े चौक पर लंगर लुटाए गए। (संवाद)

मुहम्मदाबाद। मोहर्रम की सात तारीख को हजरत हसन के पुत्र हजरत कासिम की याद में गांव में मेहंदी का जुलूस निकाला गया। इमाम चौक पर फातिहा पढ़कर अकीदतमंदों ने मुरादें मांगी।

मुहम्मदाबाद में शनिवार को देर रात मेहंदी और अलम का जुलूस श्रद्धाभाव के साथ निकाला गया। गांव के रहमानियां और इस्लाम क्लब अखाड़े के लोगों ने इमाम चौक से बड़ी मस्जिद के रास्ते से जुलूस निकाला।

आकर्षण का केंद्र रही नईम की मेहंदी

कोटरा।

दूधिया रंग की नईम की मेहंदी आकर्षण का केंद्र रही।

कस्बा कोटरा में मेहंदी का जुलूस पंच पीर से प्रारंभ होकर भान चौराहा, सब्जी मंडी, जामा मस्जिद होकर मुख्य चौक पर लाया गया। जुलूस में सबसे आगे ढोल बजाते हुए लोग चल रहे थे।

इसके पीछे चंदा की मेहंदी के साथ नईम, गालिब, अनीश के साथ सैकड़ों युवक हुसैन के नारे लगाते चल रहे थे। पीछे दूधिया रंग की आधुनिक ढंग से सजाई गई नईम की मेहंदी चल रही थी। इसके साथ नादिर बख्श, आरिफ, चांदबाबू की अगुवाई में मातमी नारे लगाते चल रहे थे। बड़े चौक पर लंगर लुटाए गए। (संवाद)



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