सहकारी ग्रामीण विकास बैंकों का राष्ट्रीय सम्मेलन, शाह बोले- हर पंचायत में पैक्स समितियों की जरूरत


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केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सहकारिता के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ने का आह्वान किया। शाह देश के सहकारी ग्रामीण विकास बैंकों के राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र 15 दिन के भीतर प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के लिए समान दिशा-निर्देश लेकर आएगा। देश की हर पंचायत में पैक्स के गठन की जरूरत है।  

देश में 8.30 लाख सहकारी समितियां
उन्होंने कहा कि देश में 8.30 लाख सहकारी समितियां है। इसके अलावा राज्य सहकारी बैंक हैं। 351 जिला  सहकारी बैंक हैं, जिनकी 14 हजार शाखाएं हैं। इसके अलावा 95 पैक्स का बड़ा समूह हमें विरासत में मिला है। शाह ने कहा कि इन सबको मिलाकर एक मजबूत इमारत बन सकती है। यह देश की वित्तीय अर्थव्यवस्था का आधार हो सकता है। 

एक अलग रणनीति बनानी होगी: शाह
उन्होंने कहा पूरे देश में सहकारिता के विकास और विस्तार के लिए एक अलग रणनीति बनानी होगी।  जिला सहकारी को पांच साल की रणनीति बनाकर काम करना होगा। पैक्स के आधुनिकीकरण के लिए कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। इससे इनके कामकाज में पारदर्शिता आएगी और कार्यप्रणाली सशक्त होगी। इससे किसानों को फायदा होगा, क्योंकि केवल पैक्स ही मानवीय दृष्टिकोण के साथ किसानों को ऋण देते हैं। इसलिए इससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ना होगा।  

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केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सहकारिता के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ने का आह्वान किया। शाह देश के सहकारी ग्रामीण विकास बैंकों के राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र 15 दिन के भीतर प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के लिए समान दिशा-निर्देश लेकर आएगा। देश की हर पंचायत में पैक्स के गठन की जरूरत है।  

देश में 8.30 लाख सहकारी समितियां

उन्होंने कहा कि देश में 8.30 लाख सहकारी समितियां है। इसके अलावा राज्य सहकारी बैंक हैं। 351 जिला  सहकारी बैंक हैं, जिनकी 14 हजार शाखाएं हैं। इसके अलावा 95 पैक्स का बड़ा समूह हमें विरासत में मिला है। शाह ने कहा कि इन सबको मिलाकर एक मजबूत इमारत बन सकती है। यह देश की वित्तीय अर्थव्यवस्था का आधार हो सकता है। 

एक अलग रणनीति बनानी होगी: शाह

उन्होंने कहा पूरे देश में सहकारिता के विकास और विस्तार के लिए एक अलग रणनीति बनानी होगी।  जिला सहकारी को पांच साल की रणनीति बनाकर काम करना होगा। पैक्स के आधुनिकीकरण के लिए कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। इससे इनके कामकाज में पारदर्शिता आएगी और कार्यप्रणाली सशक्त होगी। इससे किसानों को फायदा होगा, क्योंकि केवल पैक्स ही मानवीय दृष्टिकोण के साथ किसानों को ऋण देते हैं। इसलिए इससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ना होगा।  



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