चीन की नई चाल, पैसा फेंक कर नेपाल को लुभाने की कोशिश!


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चीन ने नेपाल को 15 अरब डॉलर की सहायता देने का एलान किया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का से बातचीत के दौरान ये रकम देने की बात कही। खड़का मंगलवार रात चीन रवाना हुए थे। खड़का और उनके साथ गए नेपाली प्रतिनिधिमंडल को अपने यहां बुलाने के लिए चीन ने एक विशेष चार्टर्ड विमान भेजा था। वहां उनके सामने ये बड़ी आर्थिक मदद देने की बात रखी गई। दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत चियानदाओ शहर में हुई।  

इससे खुश खड़का ने चीनी प्रतिनिधिमंडल के सामने फिर से ‘वन चाइना पॉलिसी’ के प्रति नेपाल की वचनबद्धता दोहराई। उन्होंने यह वादा भी किया कि नेपाल सरकार अपने देश की जमीन का चीन के खिलाफ किसी तरह का इस्तेमाल नहीं होने देगी। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक चीन नेपाल के केमिकल फर्टिलाइजर देने के अनुरोध पर भी विचार करने को तैयार हो गया है। उसने कहा है कि नेपाल में रासायनिक उर्वरक का कारखाना लागने की संभावना का वह अध्ययन कराएगा। इसके पहले नेपाल के इस अनुरोध पर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक नेपाल को अमेरिकी खेमे में जाने से रोकने के लिए चीन इतना बेसब्र है कि उसने वार्ता के दौरान नेपाली प्रतिनिधिमंडल की तरफ से रखे गए लगभग हर अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके तहत चीन कृषि क्षेत्र में नेपाल की सहायता करने पर राजी हुआ है। नेपाल की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और यहां परंपरागत औषधियों के उत्पादन में मदद देने को भी वह तैयार हुआ है। कोरोना महामारी के दौरान चीन ने नेपाल-चीन सीमा को कई जगहों पर बंद कर दिया था। इससे नेपाली कारोबारियों को बहुत दिक्कत हुई। अब दोनों देश सीमा पर महामारी नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने के लिए साझा व्यवस्था करने पर सहमत हो गए हैं।

चीन 15 अरब डॉलर की मदद 2022 में उन परियोजनाओं में निवेश के लिए देगा, जिनका चयन नेपाल करेगा। अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल ने अब तक इन परियोजनाओं का चयन नहीं किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी 2019 की नेपाल यात्रा के दौरान इस आर्थिक मदद का वादा किया था। अब चीन ने उसे जारी करने का फैसला किया है।

चियानदाओ वार्ता में दोनों विदेश मंत्रियों ने ताइवान के मसले पर भी बातचीत की। वांग ने खड़का से कहा कि अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पूरी तरह से भड़काऊ कार्रवाई थी। वार्ता के बाद जारी साझा बयान में कहा गया है- ‘पेलोसी की ताइवान यात्रा वन चाइना पॉलिसी के प्रति अमेरिकी वचनबद्धता का गंभीर उल्लंघन था।’ वांग ने नेपाल में बनी सभी सरकारों के वन चाइना पॉलिसी के प्रति वचनबद्ध रहने की सराहना की।

साझा बयान में कहा गया- ‘दुनिया में मौजूदा अफरातफरी के बीच विकसित देश और दोस्ताना पड़ोसी होने के नाते चीन और नेपाल एक दूसरे का समर्थन करते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र की मुख्य भूमिका, आंतरिक मामलों में अ-हस्तक्षेप, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के स्वर्णिम नियमों की मिल कर रक्षा करेंगे।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक खड़का की ये यात्रा फिलहाल चीन की कूटनीतिक जीत मालूम पड़ती है। इस पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होती है, अब विश्लेषकों की इस नजर है।

विस्तार

चीन ने नेपाल को 15 अरब डॉलर की सहायता देने का एलान किया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का से बातचीत के दौरान ये रकम देने की बात कही। खड़का मंगलवार रात चीन रवाना हुए थे। खड़का और उनके साथ गए नेपाली प्रतिनिधिमंडल को अपने यहां बुलाने के लिए चीन ने एक विशेष चार्टर्ड विमान भेजा था। वहां उनके सामने ये बड़ी आर्थिक मदद देने की बात रखी गई। दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत चियानदाओ शहर में हुई।  

इससे खुश खड़का ने चीनी प्रतिनिधिमंडल के सामने फिर से ‘वन चाइना पॉलिसी’ के प्रति नेपाल की वचनबद्धता दोहराई। उन्होंने यह वादा भी किया कि नेपाल सरकार अपने देश की जमीन का चीन के खिलाफ किसी तरह का इस्तेमाल नहीं होने देगी। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक चीन नेपाल के केमिकल फर्टिलाइजर देने के अनुरोध पर भी विचार करने को तैयार हो गया है। उसने कहा है कि नेपाल में रासायनिक उर्वरक का कारखाना लागने की संभावना का वह अध्ययन कराएगा। इसके पहले नेपाल के इस अनुरोध पर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक नेपाल को अमेरिकी खेमे में जाने से रोकने के लिए चीन इतना बेसब्र है कि उसने वार्ता के दौरान नेपाली प्रतिनिधिमंडल की तरफ से रखे गए लगभग हर अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके तहत चीन कृषि क्षेत्र में नेपाल की सहायता करने पर राजी हुआ है। नेपाल की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और यहां परंपरागत औषधियों के उत्पादन में मदद देने को भी वह तैयार हुआ है। कोरोना महामारी के दौरान चीन ने नेपाल-चीन सीमा को कई जगहों पर बंद कर दिया था। इससे नेपाली कारोबारियों को बहुत दिक्कत हुई। अब दोनों देश सीमा पर महामारी नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने के लिए साझा व्यवस्था करने पर सहमत हो गए हैं।

चीन 15 अरब डॉलर की मदद 2022 में उन परियोजनाओं में निवेश के लिए देगा, जिनका चयन नेपाल करेगा। अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल ने अब तक इन परियोजनाओं का चयन नहीं किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी 2019 की नेपाल यात्रा के दौरान इस आर्थिक मदद का वादा किया था। अब चीन ने उसे जारी करने का फैसला किया है।

चियानदाओ वार्ता में दोनों विदेश मंत्रियों ने ताइवान के मसले पर भी बातचीत की। वांग ने खड़का से कहा कि अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पूरी तरह से भड़काऊ कार्रवाई थी। वार्ता के बाद जारी साझा बयान में कहा गया है- ‘पेलोसी की ताइवान यात्रा वन चाइना पॉलिसी के प्रति अमेरिकी वचनबद्धता का गंभीर उल्लंघन था।’ वांग ने नेपाल में बनी सभी सरकारों के वन चाइना पॉलिसी के प्रति वचनबद्ध रहने की सराहना की।

साझा बयान में कहा गया- ‘दुनिया में मौजूदा अफरातफरी के बीच विकसित देश और दोस्ताना पड़ोसी होने के नाते चीन और नेपाल एक दूसरे का समर्थन करते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र की मुख्य भूमिका, आंतरिक मामलों में अ-हस्तक्षेप, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के स्वर्णिम नियमों की मिल कर रक्षा करेंगे।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक खड़का की ये यात्रा फिलहाल चीन की कूटनीतिक जीत मालूम पड़ती है। इस पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होती है, अब विश्लेषकों की इस नजर है।



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