भारतीयों को जोड़ती है चाय, टाटा ने इस जुड़ाव को संजोये रखा


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अधिकांश उत्पाद लोगों के घरों में उपभोग तक सीमित रहते हैं। लेकिन, इनमें से कुछ ग्राहकों के बीच पहुंचकर राष्ट्रीय और सामाजिक भावना का संदेश भी देते हैं। टाटा चाय एक ऐसा ही उत्पाद है, जिसने उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय पर्व और गर्व के अहसासों से जोड़े रखा है। इसी कड़ी में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर कंपनी ने ‘देश का गर्व’ पहल के तहत टाटा प्रीमियम चाय को नए कलेवर में पेश किया है।

इसके बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए टाटा उपभोक्ता उत्पादों (पेय पदार्थ) के प्रेसिडेंट पुनीत दास ने बताया कि चाय भले पेय पदार्थ है लेकिन यह देश को एक धागे में भी पिरोती है। इसने देश की विविधता में एकता को साकार किया है और टाटा ने इस एकजुटता को अपने सफर में संजोये रखा है। अब, इसे आगे बढ़ाते हुए कंपनी इस स्वतंत्रता दिवस पर उपभोक्ताओं को भारत के आठ गौरवांवित करने वाले लम्हों से रूबरू करा रही है, जिन्हें चाय के टिन डिब्बों पर यह उकेरा गया है।

चाय के डिब्बों पर ताजमहल से लेकर हरित क्रांति की झलक उत्तर प्रदेश में बिकने वाले डिब्बों पर ताजमहल का आठवां अजूबा होगा तो दिल्ली में पैकिंग पर 1982 में नौवें एशियाई खेलों के दूरदर्शन पर हुए रंगीन प्रसारण की छाप होगी।

इसी तरह, पश्चिम बंगाल में पहली मेट्रो, ओडिशा में हीराकुंड बांध, महाराष्ट्र के अजंता-एलोरा गुफाएं, पंजाब में हरित क्रांति व हरियाणा में खेल प्रतिभाओं समेत कुल आठ यादगार पलों को चाय के डिब्बों पर जगह दी गई है।

बेसहारा बच्चों पर खर्च होगी टी सेट्स की कमाई
फ्रीडम कलेक्शन के तहत बनाए गए टी सेट्स पर भी इन्हें पेंटिंग के रूप में पेश किया गया है। इन टी सेट्स के लिए टाटा ने ‘प्लेटेड प्रोजेक्ट’ नाम की कंपनी के साथ साझेदारी की है, जो ‘आर्ट अगेंस्ट हंगर’ अभियान चलाती है और यह इससे खरीदी जाने वाली चीजों का सारा पैसा बेसहारा-बेघर बच्चों के भोजन और सार संभाल पर खर्चती है। यानी जो लोग इसमें योगदान देना चाहते हैं, वे कला संग्रह या अपने नियमित इस्तेमाल के लिए इन टी सेट को खरीद सकते हैं।

टाटा का संदेश, अपनी उपलब्धियों पर गर्व करें
दास के मुताबिक, देश का गर्व अभियान के जरिये टाटा का संदेश है कि हम अब तक के सफर में मिली उपलब्धियों पर गर्व करें और इसे आपस में साझा करें। उन्होंने कहा, हरेक राज्य में खान-पान की स्थानीय पसंद और स्वाद होता है। इसे समझते हुए टाटा अपनी चाय बाजार में उतारती है। कंपनी की कोशिश रहती है कि हम सिर्फ एक उत्पाद न बनकर लोगों की भावनाओं से भी जुड़ें। इसी दिशा में अहम अवसरों को यादगार बनाने के लिए हम उन्हें अपनी पैकेजिंग और विज्ञापनों में जगह देते हैं।

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अधिकांश उत्पाद लोगों के घरों में उपभोग तक सीमित रहते हैं। लेकिन, इनमें से कुछ ग्राहकों के बीच पहुंचकर राष्ट्रीय और सामाजिक भावना का संदेश भी देते हैं। टाटा चाय एक ऐसा ही उत्पाद है, जिसने उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय पर्व और गर्व के अहसासों से जोड़े रखा है। इसी कड़ी में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर कंपनी ने ‘देश का गर्व’ पहल के तहत टाटा प्रीमियम चाय को नए कलेवर में पेश किया है।

इसके बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए टाटा उपभोक्ता उत्पादों (पेय पदार्थ) के प्रेसिडेंट पुनीत दास ने बताया कि चाय भले पेय पदार्थ है लेकिन यह देश को एक धागे में भी पिरोती है। इसने देश की विविधता में एकता को साकार किया है और टाटा ने इस एकजुटता को अपने सफर में संजोये रखा है। अब, इसे आगे बढ़ाते हुए कंपनी इस स्वतंत्रता दिवस पर उपभोक्ताओं को भारत के आठ गौरवांवित करने वाले लम्हों से रूबरू करा रही है, जिन्हें चाय के टिन डिब्बों पर यह उकेरा गया है।

चाय के डिब्बों पर ताजमहल से लेकर हरित क्रांति की झलक उत्तर प्रदेश में बिकने वाले डिब्बों पर ताजमहल का आठवां अजूबा होगा तो दिल्ली में पैकिंग पर 1982 में नौवें एशियाई खेलों के दूरदर्शन पर हुए रंगीन प्रसारण की छाप होगी।

इसी तरह, पश्चिम बंगाल में पहली मेट्रो, ओडिशा में हीराकुंड बांध, महाराष्ट्र के अजंता-एलोरा गुफाएं, पंजाब में हरित क्रांति व हरियाणा में खेल प्रतिभाओं समेत कुल आठ यादगार पलों को चाय के डिब्बों पर जगह दी गई है।

बेसहारा बच्चों पर खर्च होगी टी सेट्स की कमाई

फ्रीडम कलेक्शन के तहत बनाए गए टी सेट्स पर भी इन्हें पेंटिंग के रूप में पेश किया गया है। इन टी सेट्स के लिए टाटा ने ‘प्लेटेड प्रोजेक्ट’ नाम की कंपनी के साथ साझेदारी की है, जो ‘आर्ट अगेंस्ट हंगर’ अभियान चलाती है और यह इससे खरीदी जाने वाली चीजों का सारा पैसा बेसहारा-बेघर बच्चों के भोजन और सार संभाल पर खर्चती है। यानी जो लोग इसमें योगदान देना चाहते हैं, वे कला संग्रह या अपने नियमित इस्तेमाल के लिए इन टी सेट को खरीद सकते हैं।

टाटा का संदेश, अपनी उपलब्धियों पर गर्व करें

दास के मुताबिक, देश का गर्व अभियान के जरिये टाटा का संदेश है कि हम अब तक के सफर में मिली उपलब्धियों पर गर्व करें और इसे आपस में साझा करें। उन्होंने कहा, हरेक राज्य में खान-पान की स्थानीय पसंद और स्वाद होता है। इसे समझते हुए टाटा अपनी चाय बाजार में उतारती है। कंपनी की कोशिश रहती है कि हम सिर्फ एक उत्पाद न बनकर लोगों की भावनाओं से भी जुड़ें। इसी दिशा में अहम अवसरों को यादगार बनाने के लिए हम उन्हें अपनी पैकेजिंग और विज्ञापनों में जगह देते हैं।



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