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सेंडेंटरी लाइफ हृदय के लिए नुकसानदायक फिर जिम जाने वालों में क्यों बढ़ रही दिक्कत

ByNews Desk

Aug 13, 2022


मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को बुधवार को वर्कआउट के दौरान दिल का दौरा पड़ा था, तब से वह अस्पताल में हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है, उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। हार्ट अटैक के बाद उनकी एंजियोप्लास्टी की गई है, प्रशंसक और शुभचिंतक उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

राजू श्रीवास्तव को आए हार्ट अटैक ने एक बार फिर से फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने वाले लोगों में बढ़ते हृदय रोग और हार्ट अटैक को लेकर बहस छेड़ दी है। इससे पहले भी कई मशहूर अभिनेता जिम के दौरान हार्ट अटैक का शिकार हो चुके हैं।

क्या यह अच्छे फिटनेस के चक्कर में बहुत अधिक व्यायाम का परिणाम है, या इसे लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण होने वाली दिक्कत मानी जा सकती है? इस तरह के सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि आमतौर पर हृदय रोगों के मामले उम्र बढ़ने के साथ देखे जाते रहे हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि तेजी से यह समस्या 50 साल से कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही है। आइए विशेषज्ञ से इसके कारण और बचाव के उपायों के बारे में जानते हैं।

हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिम को समझिए

कम उम्र में हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे के बारे में समझने के लिए हमने वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक मोहन से संपर्क किया। क्या हार्ट अटैक का शिकार कोई भी हो सकता है? इस सवाल के जवाब में डॉ अभिषेक कहते हैं, हृदय रोग एक बड़ा टर्म है, जरूरी नहीं है कि हमें हर बार रोग के लक्षण स्पष्ट दिखें हीं। अगर आपको पहले से ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी दिक्कत नहीं है तो भी कुछ स्थितियां आपमें हृदय रोग और हार्ट अटैक की समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

इसमें आनुवांशिकता को एक प्रमुख कारक के दौर पर देखा जाता है। यानि कि अगर आपके परिवार में किसी को हृदय रोगों की गंभीर समस्या रह चुकी है तो आपमें भी इसका जोखिम हो सकता है। इस आधार पर अपने स्वास्थ्य की जांच करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है।

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल ने बढ़ा दी है चिंता

डॉ अभिषेक कहते हैं, कम उम्र के जितने भी लोगों में हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, उनमें से ज्यादा में एक समस्या सबसे कॉमन है वह है- निष्क्रिय जीवनशैली यानी कि सेंडेंटरी लाइफस्टाइल। लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना, शारीरिक रूप से कम मेहनत करना आपमें सिर्फ हृदय रोग ही नहीं डायबिटीज सहित कई अन्य समस्याओं को भी बढ़ा देता है।

कई लोगों को तो ऐसा भी देखा गया है कि वह ऑफिस तक में जाने के लिए लिफ्ट का प्रयोगअधिक करते हैं, बजाए सीढ़ियां चढ़ने के। शरीर को वास्तव में इतना आरामदायक बनाना आपके लिए भविष्य में कई तरह की समस्याओं के खतरे को बढ़ा सकता है।

जिम जाने वाले क्यों हो रहे शिकार?

अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि अगर निष्क्रिय जीवनशैली के कारण हृदय रोगों का खतरा बढ़ रहा है तो फिर वह लोग हार्ट अटैक के शिकार क्यों होते जा रहे हैं, जो फिटनेस फ्रीक हैं और रोजाना जिम जाते हैं? इस बारे में डॉ अभिषेक कहते हैं, जिम जाना ही आपके स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है, आप वहां किस तरह के अभ्यास करते हैं और कितनी देर करते हैं इसका भी सीधा असर हृदय को प्रभावित करता है।

अक्सर देखा गया है कि तेजी से बॉडी बनाने के चक्कर में हम अपनी शारीरिक क्षमता को नजरअंदाज करते हुए तीव्रगति वाले व्यायाम करने लगते हैं, जल्दी बॉडी बन जाए इसके चक्कर में घंटों व्यायाम करते रहते हैं, यह भी बहुत नुकसानदायक है।

बहुत अधिक व्यायाम के कारण हृदय पर अनावश्यक दबाव बढ़ जाता है, हमें इस बात का भले ही अंदाजा न हो पर यह हमारे हृदय गति को सीमा से अधिक बढ़ा सकती है। ट्रेडमिल पर कैलोरी बर्न करने के लिए बहुत तेजी से चलते हैं तो यह सभी नुकसानदायक हैं। हमे सबसे पहले अपनी शारीरिक क्षमता को जानना होगा और उसी के आधार पर व्यायाम का चयन करनी की आदत बनानी होगी।

ये आदतें भी सुधार लें वरना हो सकती है परेशानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों के लिए निश्चित तौर पर हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल एक प्रमुख कारक है, ऐसे में व्यवहार में ऐसी किसी भी आदत को शामिल न करें जो इनके स्तर को तेजी से बढ़ा सकती हैं, जैसे- अधिक नमक का सेवन, धूम्रपान-शराब, अधिक तनाव लेने की आदत, अधिक फैट वाली चीजों का सेवन करना आदि।

हृदय रोगों के मामले जिस तरह से बढ़ते जा रहे हैं इसे देखते हुए वयस्कों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

 


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नोट: यह लेख विशेषज्ञों की सलाह के  आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।



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