बार एसोसिएशन अध्यक्ष के चेंबर में बनी आत्मसमर्पण की रणनीति, फजीहत के बाद लिया ये फैसला


कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के शनिवार को कोर्ट से चले जाने से हुई फजीहत के बाद दो दिन तक हालात संभालने के लिए कड़ी कवायद चली। सोमवार सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक कचहरी में मंत्री के कोर्ट में आत्मसमर्पण और उनकी रिहाई के लिए बार और लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पूरी जान लगा दी। सारी रणनीति बार एसोसिएशन अध्यक्ष के चेंबर में बनी और लगभग दो घंटे तक मंत्री वहीं बैठकर अदालती कार्यवाही की पल-पल की जानकारी लेते रहे।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी के चेंबर में सुबह लगभग 12 बजे ही कैबिनेट मंत्री राकेश सचान पहुंच गए थे। इसके बाद अधिवक्ताओं की फौज समर्पण पर रणनीति तैयार करने में जुट गई। फाइल के पुनर्गठन की जानकारी होने पर दो बजे समर्पण करने की बात तय हुई। इसी बीच पता चला कि फाइल में 10 अगस्त की तारीख लग चुकी है।

इसके बाद सुनवाई के लिए अर्जी तैयार की गई। समर्पण प्रार्थना पत्र तैयार करने के बाद सजा की स्थिति में रिहाई कैसे हो इस पर मंथन हुआ। इसके बाद अपील अवधि के दौरान रिहाई के लिए समय मांगे जाने की बात तय हुई और इसके लिए भी एक प्रार्थना पत्र तैयार किया गया। जमानतों के लिए बंधपत्र और निजी बंधपत्र तैयार हुए।

इन सारी कवायदों के बीच अधिवक्ताओं और मंत्री समर्थकों की एक लंबी-चौड़ी फौज कोर्ट और चेंबर के बीच कड़ी के रूप में काम करती रही। सभी प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए जाने और पूरी तरह से आश्वस्त हो जाने के बाद मंत्री जी को दोपहर लगभग दो बजे सीएमएम कोर्ट के सामने स्थित अधिवक्ता के चेंबर से नई बिल्डिंग के द्वितीय तल पर स्थित एसीएमएम तृतीय की अदालत तक भारी सुरक्षा के बीच लाया गया। जहां मंत्रीजी ने आत्मसमर्पण कर दिया।

अपील के लिए मिला 15 दिन का समय

राकेश सचान की ओर से अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 389 के तहत एक प्रार्थना पत्र और शपथपत्र कोर्ट में दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि दोष सिद्धि आदेश की अपील दाखिल करने व अपीलीय न्यायालय से आदेश प्राप्त करने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया जाए। राकेश की इस अर्जी को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए उन्हें बीस-बीस हजार की दो जमानतें और इतनी ही धनराशि का निजी मुचलका दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दे दिया।

पेट खराब होने के कारण कोर्ट से चले गए थे मंत्री

मुकदमे में शनिवार को दोषी करार दिए जाने के बाद मंत्री सजा पर फैसला होने से पहले ही कोर्ट से चले गए थे। सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण अर्जी देकर उन्होंने कहा कि शनिवार को अचानक पेट खराब हो जाने और अस्वस्थ महसूस करने पर वह अपने अधिवक्ता से हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिलवाकर चले गए थे। समाचार पत्रों में छपी खबरों से जानकारी मिलने के बाद वह न्यायालय में आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

जिला जज के आदेश पर हुआ पत्रावली का पुनर्गठन

अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट तृतीय की अदालत से शनिवार को राकेश सचान को दोषी करार दिया जा चुका था। पूरा आदेश भी टाइप हो चुका था और पत्रावली में लगा था लेकिन हंगामे के बीच आदेश की प्रति फाइल से गायब हो गई थी। इसके बाद एक प्रकीर्ण पत्रावली (मिसलीनियस फाइल) तैयार की गई। जिस पर जिला जज मयंक कुमार जैन ने आदेश के पुनर्गठन (रीकंस्ट्रक्शन) के आदेश दिए। जिसके बाद एसीएमएम तृतीय के न्यायालय में दोबारा पूरा आदेश तैयार किया गया और फिर प्रकीर्ण पत्रावली में दर्ज कर उस पर सजा सुनाई गई।

सोमवार को ही सुनवाई के लिए दी गई अर्जी

जिला जज के आदेश पर जो प्रकीर्ण पत्रावली दर्ज की गई उसमें मामले की सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख तय थी। सोमवार को राकेश सचान कोर्ट में समर्पण करते तो उन्हें सुनवाई की तारीख तक के लिए जेल जाना पड़ता। इस पर सचान के अधिवक्ता रामेंद्र कटियार की ओर से एक अर्जी देकर कोर्ट से मामले में सोमवार को ही सुनवाई करने की मांग की गई। इसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मुकदमे में सजा सुनाकर उसका निस्तारण कर दिया।

मंत्री राकेश सचान के पास लाइसेंसी असलहा था। बिना किसी स्वतंत्र गवाह के सिर्फ पुलिस की गवाही और जिरह के आधार पर कोर्ट में मंत्री के खिलाफ आदेश पारित हो गया। मंत्री की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थिति को देखते हुए रिहाई की मांग भी की गई थी लेकिन दोष सिद्धि हो चुकी थी इसलिए अब सेशन कोर्ट में अपील के दौरान सभी बिंदु रखे जाएंगे।– नरेश चंद्र त्रिपाठी, बार एसोसिएशन अध्यक्ष



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