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स्ट्रीट लाइट घोटाले में सचिव निलंबित, एडीओ को नोटिस

ByNews Desk

Aug 11, 2022


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उरई/कदौरा। ब्लाक क्षेत्र कदौरा के अकबरपुर गांव में हुए स्ट्रीट लाइट घोटाले में तत्कालीन सचिव को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में तत्कालीन प्रशासन, एडीओ आईएसबी और प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई के आदेश के बाद एडीओ और प्रधान पर कार्रवाई न करके जिला विकास अधिकारी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी करने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में तीन दोषियों के खिलाफ दोहरा मापदंड अपनाने की वजह क्या है, इसको लेकर भी अधिकारी बोलने से कतरा रहे हैं।
अकबरपुर इटौरा में स्ट्रीट लाइट लगाने में घोटाले का खुलासा उपनिदेशक झांसी संजय यादव की जांच में 12 जुलाई को हुआ था। इसमें 260 लाइटों की जगह 83 लाइटें मिली थी। उपनिदेशक पंचायत झांसी ने सत्यापन रिपोर्ट डीएम चांदनी सिंह को सौंपी थी। डीएम ने 23 जुलाई को गबन में दोषी तत्कालीन प्रशासक मनोज कुमार गुप्ता, एडीओ आईएसबी पर 1.39 लाख रुपये, ग्राम विकास अधिकारी पर 1.96 लाख रुपये और ग्राम प्रधान रामशंकर से 57 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश दिए थे। यह खबर 7 और 9 अगस्त को अमर उजाला की ओर से प्रकाशित ने प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशन के बाद आनन-फानन में उपनिदेशक पंचायत झांसी संजय ने दोबारा अकबरपुर गांव पहुंचकर इसकी जांच की थी। डीएम के आदेश पर डीडीओ सुभाष चंद्र ने ग्राम विकास अधिकारी नवीन कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया। कदौरा के खंड विकास अधिकारी बृजकिशोर कुशवाहा का कहना है कि स्ट्रीट लाइट घोटाले में तत्कालीन ग्राम सचिव को निलंबित कर दिया गया है। तत्कालीन प्रशासक एडीओ, आईएसबी और प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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जांच हो तो और मामले खुलेंगे
सरकार की ओर अकबरपुर इटौरा को औचक जांच की सूची में शामिल किया गया था। झांसी मंडल से दो और प्रदेश भर से 36 गांवों में इस तरह की जांच के आदेश दिए गए थे। झांसी मंडल में अकबरपुर इटौरा के अलावा बवीना को भी जांच में शामिल किया गया है। औचक जांच में घोटाला खुलने पर ऐसा माना जा रहा है कि दूसरे गांवों में भी जांच कराई जाए तो वहां भी कई मामले खुल सकते हैं।

उरई/कदौरा। ब्लाक क्षेत्र कदौरा के अकबरपुर गांव में हुए स्ट्रीट लाइट घोटाले में तत्कालीन सचिव को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में तत्कालीन प्रशासन, एडीओ आईएसबी और प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई के आदेश के बाद एडीओ और प्रधान पर कार्रवाई न करके जिला विकास अधिकारी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी करने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में तीन दोषियों के खिलाफ दोहरा मापदंड अपनाने की वजह क्या है, इसको लेकर भी अधिकारी बोलने से कतरा रहे हैं।

अकबरपुर इटौरा में स्ट्रीट लाइट लगाने में घोटाले का खुलासा उपनिदेशक झांसी संजय यादव की जांच में 12 जुलाई को हुआ था। इसमें 260 लाइटों की जगह 83 लाइटें मिली थी। उपनिदेशक पंचायत झांसी ने सत्यापन रिपोर्ट डीएम चांदनी सिंह को सौंपी थी। डीएम ने 23 जुलाई को गबन में दोषी तत्कालीन प्रशासक मनोज कुमार गुप्ता, एडीओ आईएसबी पर 1.39 लाख रुपये, ग्राम विकास अधिकारी पर 1.96 लाख रुपये और ग्राम प्रधान रामशंकर से 57 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश दिए थे। यह खबर 7 और 9 अगस्त को अमर उजाला की ओर से प्रकाशित ने प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशन के बाद आनन-फानन में उपनिदेशक पंचायत झांसी संजय ने दोबारा अकबरपुर गांव पहुंचकर इसकी जांच की थी। डीएम के आदेश पर डीडीओ सुभाष चंद्र ने ग्राम विकास अधिकारी नवीन कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया। कदौरा के खंड विकास अधिकारी बृजकिशोर कुशवाहा का कहना है कि स्ट्रीट लाइट घोटाले में तत्कालीन ग्राम सचिव को निलंबित कर दिया गया है। तत्कालीन प्रशासक एडीओ, आईएसबी और प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

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जांच हो तो और मामले खुलेंगे

सरकार की ओर अकबरपुर इटौरा को औचक जांच की सूची में शामिल किया गया था। झांसी मंडल से दो और प्रदेश भर से 36 गांवों में इस तरह की जांच के आदेश दिए गए थे। झांसी मंडल में अकबरपुर इटौरा के अलावा बवीना को भी जांच में शामिल किया गया है। औचक जांच में घोटाला खुलने पर ऐसा माना जा रहा है कि दूसरे गांवों में भी जांच कराई जाए तो वहां भी कई मामले खुल सकते हैं।



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