मौत के राज खोलने में यह है सबसे बड़ी बाधा, अभी कारण स्पष्ट नहीं


भाजपा नेता सोनाली फोगाट की मौत का राज अभी जनता के सामने नहीं आ सकेगा। चिकित्सक बोर्ड ने अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के स्पष्ट कारणों का कोई खुलासा नहीं किया। बोर्ड ने लिखा कि वह मौत का कारण तीन सैंपल की जांच के बाद ही बता सकेंगे। इन सैंपल की रिपोर्ट आने में तीन महीने तक का समय लगने के आसार हैं। 

चिकित्सकों के अनुसार मौत के बाद पहले शव के पोस्टमार्टम के लिए जितनी जल्द सैंपल लिए जाएं उतने ही बेहतर व सटीक परिणाम आते हैं। मौत के 60 घंटे बाद सैंपल लिए जाने के बाद रिपोर्ट पूरी तरह से पुख्ता होने की संभावना कम हो जाती है। सोनाली की मौत के करीब 52 घंटे बाद सैंपल लिए गए हैं। 52 घंटे बाद सैंपल लेना मौत के राज खोलने में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है। मीडिया को डिटेल रिपोर्ट के बजाय पोस्टमार्टम की समरी रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई है। जिसमें यह जानकारी भी नहीं है कि कौन-कौन से सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

भाजपा नेता सोनाली फोगाट की मौत के बाद गोवा पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में ही तीन दिन लगा दिए, उससे साफ है कि पुलिस की जांच की गति क्या रहेगी। ऐसे में चिकित्सकों की ओर से रिपोर्ट में भी देरी होने की आशंका रहेगी। मामला दूसरे राज्य से जुड़ा होने के कारण गोवा के चिकित्सकों व पुलिस की टीम पर इस मामले का खुलासा करना प्राथमिकता नहीं होगी।

रिपोर्ट आने में 7 से 90 दिन का लगेगा समय

विसरा, हार्ट, ब्लड सैंपल की रिपोर्ट आने में कम से कम सात दिन का समय लगता है। अगर सामान्य तरीके से प्रक्रिया पूरी होगी तो इसमें करीब 90 दिन का समय लगेगा। अगर फोरेंसिक लैब के विशेषज्ञों पर काम का दबाव हो तो इससे भी अधिक समय लग जाएगा। 

क्या-क्या भेजा जांच के लिए

रिपोर्ट के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद चिकित्सकों ने शव में खाने के अवशेष का विसरा, हार्ट, किडनी सहित अन्य अंगों के टुकड़े, ब्लड सैंपल, शरीर में मौजूद तरल पदार्थ के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। इन सभी के विश्लेषण के बाद ही चिकित्सक अपनी रिपोर्ट देंगे।

चिकित्सकों की ओर से रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। चिकित्सकों ने मौत के कारणों के लिए तीन जांच रिपोर्ट केमिकल विश्लेषण, उत्तकों की जांच व सीरोलॉजिकल रिपोर्ट को जरूरी बताया है। इसके सैंपल चिकित्सकों ने भेजे होंगे। सैंपलों की विस्तृत जानकारी समरी रिपोर्ट में नहीं है। मौत के कारणों का खुलासा करने में समय लगता है। यह विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण का काम है, इतना आसान नहीं। – डॉ. एपी सेतिया, पूर्व प्रधान, आईएमए हरियाणा



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