Hamara Kasba I Hindi News I Bundelkhand News

ब्रिटिश काल के कई प्रावधान खत्म, जेल में बंदियों को मिलेगी अधिक सहूलियत, घर जैसा मिलेगा खाना

ByNews Desk

Aug 16, 2022


आजादी के 75 साल पूरा होने पर योगी सरकार ने प्रदेश की जेलों को ब्रिटिश काल के मैनुअल से आजादी दे दी है। सभी बंदियों को न सिर्फ घर जैसा खाना दिया जाएगा, बल्कि जेल के बंदी रक्षकों को भी आधुनिक हथियारों से लैस किया जाएगा। कारागार विभाग द्वारा तैयार किए गए इससे संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। ‘उप्र जेल मैनुअल 1941’ के अनुपयोगी हो चुके प्रावधानों को समाप्त कर प्रस्तावित ‘उप्र जेल मैनुअल 2022’ में बंदियों के लिए तमाम नई सुविधाएं भी दी जाएंगी। इसमें बंदी अपराधियों के अपराध करने के नए-नए तरीकों  से निपटने के उद्देश्य से कारागार प्रशासन व प्रबंध व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाने का प्रस्ताव शामिल है। नए संशोधन में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्मित मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 के प्रावधानों को लागू किया जाएगा।

शिशुकक्ष व बालवाड़ी की व्यवस्था
कारागार राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि नये मैनुअल के मुताबिक जेल में निरूद्ध महिलाओं के साथ रहने वाले 6 वर्ष तक के बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए एक शिशुकक्ष और एक बालवाड़ी (नर्सरी) की व्यवस्था होगी। 3 साल से कम उम्र के बच्चों को शिशु कक्ष में और  3 साल से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों का देखभाल बालवाड़ी में किया जाएगा। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के साथ ही इनके मनोरंजन, टीकाकरण और पौष्टिक भोजन देने की भी व्यवस्था होगी। मां की सहमति से 4 से 6 साल की आयु वाले बच्चों को जेल से बाहर भी किसी विद्यालय में प्रवेश कराया जा सकेगा। उसके स्कूल जाने के लिए वाहन की व्यवस्था सरकारी खर्चे पर होगा।

ये छह जिला जेल होंगे हाई सिक्योरिटी
लखनऊ, चित्रकूट, गौतमबुद्धनगर, आजमगढ़, ललितपुर व बरेली

चार श्रेणियों में बांटे जाएंगे जेल
मौजूदा व्यवस्था में जिला कारागारों में बंदी संख्या के आधार पर 5 श्रेणियां हैं। इसमें 500 से अधिक, 301 से 500 तक, 151 से 300 तक 101 से 150 तक 01 से 100 तक निर्धारित थीं। नये मैनुअल में चार श्रेणियां होंगी। श्रेणी-ए की कारागार में 2000 से अधिक बंदी, श्रेणी-बी में 1501 से 2000, श्रेणी-सी में 1001 से 1500 और श्रेणी-डी में 1000 तक बंदी।

बंदी रक्षकों को रायफल के स्थान पर 9 एमएम की पिस्टल
अब तक बंदी रक्षकों को अंग्रेजों के जमाने की 303 रायफल ही मिलती थी। अब उन्हें 9 एमएम की पिस्टल, इन्सास और कार्बाइन मिलेगी। इससे वे खूंखार अपराधियों से निपटने में सक्षम होंगे। आपात स्थिति में स्थिति नियंत्रित करने के लिए बाहरी फोर्स की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। बंदियों की सुरक्षा के लिए चेस्ट गार्ड, एल्बोगार्ड, फाइबर ग्लास, हेलमेट, पॉली कॉर्बोनेट शील्ड व लाठी के अलावा दंगारोधी टीजर गन आंसू गैस, वाटर कैनन, शॉक बटन, पेपर वॉल गन भी मुहैया कराया जाएगा।

महिला बंदियों को ये सुविधाएं
– मंगल सूत्र व सलवार-सूट पहने की छूट मिलेगी।
– सेनेटरी नैपकिन, नारियल तेल एवं शैम्पू मिलेगा।
– कारागार में जन्में बच्चों का जन्म पंजीकरण, टीकाकरण एवं नामकरण कराया जाएगा
 – बच्चों के लिये क्रेच, नर्सरी, खेलकूद, मनोरंजन और शिक्षा की व्यवस्था
– गर्भवती एवं नर्सिग माताओं को पौष्टिक आहार व चिकित्सीय सुविधायें
– टूथ पाउडर, चप्पल, कूलर मिलेगा।

पुरुष बंदियों को मिलेगी यें सुविधाएं
– दाढ़ी बनाने के लिए कैन्टीन से खरीद सकेंगे कारट्रिज रेजर
– नाई एवं कपड़ा धुलाई भी करा सकेंगे

बंदियों को रोज मिलेगी चटनी, त्योहारों पर सेंवई व खीर
यूपी के नए जेल मैनुअल में बंदियों को सप्ताह में दो बार के स्थान पर प्रतिदिन चटनी, माह में एक बार कढ़ी चावल, प्रतिदिन शाम को चाय, कारागारों में बेकरी की व्यवस्था और ईद एव बकरीद पर सेवई एवं होली, दीपावली एवं राष्ट्रीय पर्वों पर खीर एवं व्रत के समय विशेष भोजन दिया जाएगा। हिंदू बन्दियाें को शिवरात्रि, रामनवमी, अनंत चतुर्दशी, देवोत्थानी एकादशी, जन्माष्टमी, नवरात्रि, करवा चौथ, तीज और भीम एकादशी पर और मुस्लिम बंदियों को रोजा रखने की अनुमति होगी।

इसमें महिलाओं के स्वास्थ्य पर खास फोकस किया गया है। उन्हें नहाने और कपड़ा धोने के लिए जहां अब साबुन देने का प्रावधान किया गया है, वहीं, प्रतिमाह 60-60 ग्राम सरसों और नारियल का तेल भी दिया जाएगा। जबकि बाल धुलने के लिए 20 एमएल शैंपू भी दिए जाएंगे। इसी प्रकार नए जेल मैनुअल में बंदियों की शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

जेल में ही बंदियों के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में सभी राज्य के सभी सरकारी विभाग, एनजीओ, शिक्षाविद्,  कॉरपोरेट घराने, व्यवसायी या कोई अन्य मान्यता प्राप्त एजेंसी शामिल हो सकेंगी। इस कार्यक्रम के तहत बंदियों के शारीरिक और स्वास्थ्य शिक्षा, अकादमिक शिक्षा, सामाजिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा व सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा।

कतिपय प्रतिबंधों के साथ बंदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की भी सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा जेल में उद्योग व बंदियों की सहकारी समितियों का भी गठन किया जाएगा। कारागार मुख्यालय पर कारागर महानिदेशक की अध्यक्षता में कौशल विकास कार्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा प्रशिक्षण समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति बंदियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम कराने की योजना तैयार करने समेत अन्य काम करेगी। बंदियों को रेडीमेड कपड़े तैयार करने, निर्माण कार्य, बढ़ईगिरी, प्लंबरिंग, इलेक्ट्रिशियन, दर्जी, चमड़ा और कृषि, मुर्गी पालन और कम्प्यूटर चलाने का प्रशिक्षण दिया दिया जाएगा?

अप्रसांगिक हो चुकी ये व्यवस्थाएं भी होंगी समाप्त
– लॉकअप जेल की व्यवस्था समाप्त
– यूरोपीय बंदियों के लिए अब अलग जेल की व्यवस्था नहीं होगी
– रजवाड़ों के बंदी के लिए मुक्ति और स्थानांतरण की व्यवस्था
– नेपाल, भूटान, सिक्किम एवं कश्मीर के बंदियों की मुक्ति और स्थानांतरण की व्यवस्था खत्म
– क्षय रोग से ग्रसित बंदियों के लिए जिला कारागार सुल्तानपुर के निर्धारण की व्यवस्था खत्म
– कालापानी की सजा के लिए कैदी अब पोर्ट ब्लेयर स्थानांतरित नहीं होंगे
– जेलों में अब नहीं बनेंगे शुष्क शौचालय, जेलों में लालटेन की व्यवस्था खत्म

सभी जेल में रखें जाएंगे टीबी रोगी
टीबी से ग्रसित बंदियों के लिए सिर्फ सुल्तानपुर जेल के निर्धारण की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। यानि अब ऐसे रोगी प्रदेश के सभी जेल में रह सकते हैं। वहीं उनका इलाज होगा।

ये भी हैं प्रमुख संशोधन
– एक ही जेल में निरुद्ध रक्त संबंधी एवं पति-पत्ली अब आपस में मुलाकात कर सकेंगे
– रक्त संबंधी अथवा पति-पत्नी की मृत्यु पर अंतिम दर्शन की होगी व्यवस्था
– विदेशी बंदियों की से भी हो सकेगी मुलाकात
– बंदियों से मुलाकात करने वालों को दिखाना होगा फोटोयुक्त पहचान पत्र
– अब किसी बंदी द्वारा जेल में अपराध करने पर उसे हथकड़ी व बेड़ी नहीं लगाया जाएगा और न ही उसे तनहाई में डाला जाएगा।
– बंदियों को मई व जून को छोड़कर सभी महीनों में चाय के साथ 4 बिस्किट मिलेंगे
– जेलों में पके हुए सामान बनाने के लिये बेकरी की होगी स्थापना
– निराश्रित बंदियों को चप्पल दिया जाएगा, पर रिहाई के समय जमा करना होगा।
– सभी जेलों में एक बंदी कल्याण कैंटीन तथा बंदी कल्याण कोष की स्थापना होगी
– जेल बंदियों की एक पंचायत होगी, जेल प्रशासन करेगा पंचायत के कामकाज की निगरानी
– बंदी की मृत्यु पर सीएमओ की देखरेख में अनिवार्य होगा पोस्टमार्टम

प्रदेश में लेखपाल की भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से कराने और लेखपाल भर्ती में साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश लेखपाल सेवा (चतुर्थ संशोधन) नियमावली-2022 को मंजूरी दी है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने बताया कि पहले लेखपाल भर्ती राजस्व परिषद की ओर से गठित समिति के जरिये की जाती थी। इसमें 80 अंक की परीक्षा और 20 अंक के साक्षात्कार की व्यवस्था थी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश लेखपाल सेवा (चतुर्थ संशोधन) नियमावली-2022 को कैबिनेट से मंजूरी के बाद लेखपाल भर्ती परीक्षा में साक्षात्कार की व्यवस्था को समाप्त किया है। अब 100 अंक की परीक्षा होगी। उन्होंने बताया कि भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिये कराई जाएगी।

प्रदेश में प्रारंभिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। योगी कैबिनेट की मंगलवार को आयोजित बैठक में भारत सरकार के दिशा निर्देश के तहत पैक्स के कंप्यूटरीकरण की योजना को लागू करने की मंजूरी दी गई। पैक्स की कंप्यूटरीकरण योजना को लागू करने वाला यूपी पहला राज्य होगा।

सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने बताया कि प्रदेश में सभी 7400 पैक्स को कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। योजना के पहले चरण में 2022-23 में 1500 पैक्स, 2023-24 में 2900 और 2024-25 में 3000 पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। योजना को लागू करने के लिए आने वाले व्ययभार में भारत सरकार की ओर से 60.73 प्रतिशत, राज्य सरकार की ओर से 29.25 प्रतिशत और नाबार्ड की ओर से 10.02 प्रतिशत वहन किया जाएगा। योजना को लागू करने के लिए राज्य स्तर पर सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कार्यान्वयन समिति का गठन किया है।

योजना के तहत साफ्टवेयर साइबर सुरक्षा डाटा स्टोरेज ट्रेनिंग एवं परियोजना निगरानी इकाई सपोर्ट सिस्टम पर होने वाला व्यय भारत सरकार और नाबार्ड की ओर से व्यय किया जाएगा। नाबार्ड की ओर से हर जिले में 200 पैक्स के लिए आईटी विशेषज्ञों की एक टीम बनाई जाएगी। नाबार्ड की ओर से पांच वर्ष तक योजना की होल्डिंग की जाएगी। परियोजना समाप्ति की तिथि 31 मार्च 2027 होगी।

इस वर्ष के अंत में होने वाले नगर निकाय के चुनाव को देखते हुए सरकार ने एक और नई नगर पंचायत का गठन करते हुए प्रतापगढ़ के मान्धाता बाजार को नई नगर पंचायत का दर्जा दिया गया है। वहीं, जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर नगर पालिका परिषद के सीमा का विस्तार करने का भी फैसला किया गया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही प्रदेश में अब नगर निकायों की कुल संख्या 752 हो गई है।

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्रतापगढ़ के डीएम द्वारा उपलब्ध कराये गए प्रस्ताव के आधार पर सरकार ने मन्धाता को नगर पंचायत बनाने का फैसला किया है। इसी प्रकार सरकार ने जौनपुर के डीएम के प्रस्ताव पर मुंगराबादशाह पुर नगर पालिका परिषद का विस्तार करने का फैसला किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक मुंगरा बादशाहपुर नगर पालिका परिषद में आसपास के12 राजस्व ग्रामों को शामिल किया गया है।

कैबिनेट ने फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट अलीगढ़ (एफसीआई) को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) में उच्चीकृत किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। इससे संस्थान की क्षमता का विस्तार होगा। साथ ही सालाना लगभग 1700 से अधिक छात्र-छात्राओं को परास्नातक डिग्री, पीजी डिप्लोमा, स्नातक डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट व कौशल विकास पाठ्यक्रमों को मिलाकर कुल 17 प्रकार के कोर्सों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

संस्थान में रोजगारपरक विभिन्न पाठ्यक्रमों में शिक्षण-प्रशिक्षण होगा। इससे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय विकास भी होगा। इस परियोजना पर आने वाले वास्तविक व्यय भार का आकलन योजनानुसार किया जायेगा। यह राज्य पोषित योजना है। कैबिनेट ने इसके साथ ही वर्तमान फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट के संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा वेतन भत्तों के मद में दिए जा रहे अनुदान को उच्चीकृत होने के बाद नवसृजित इंस्टीट्यूट को आवंटित करने की स्वीकृति दे दी है। यही नहीं नए इंस्टीट्यूट के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ  होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी के मानकों के अनुरूप कुल 71 पदों की स्वीकृति दी गई है। साथ ही वर्तमान में एफसीआई, अलीगढ़ के लिए स्वीकृत 19 पदों का उच्चीकृत इंस्टीट्यूट में विलय करते हुए बाकी 52 पदों को सृजित करने की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही आगे आवश्यक निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दी गई है।

प्रदेश में ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इससे संबंधित विनियमों को भी हरी झंडी दे दी गई है। इससे वन विभाग और वन निगम के माध्यम से प्रदेश के वन्य अभयारण्य के बाहर क्षेत्र में पर्यटन अवस्थापना सुविधाओं के विकास और प्रबंधन के लिए उप्र. ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड का गठन हो सकेगा। बोर्ड का मुख्यालय लखनऊ में होगा और मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि बोर्ड की संरचना में ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड और ईको-टूरिज्म कार्यकारी समिति शामिल होगी। बोर्ड के सदस्य 2 प्रकार के होंगे। शासकीय (पदेन) सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य। कृषि, वन, आयुष, वित्त, पर्यटन, सिंचाई और ग्राम्य विकास विभागों के मंत्री, अध्यक्ष उप्र. वन निगम, मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य संरक्षक और विभागाध्यक्ष बोर्ड के सदस्य और अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव पर्यटन बोर्ड के सदस्य सचिव होंगे।

अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। आईआरसीटीसी, सशस्त्र सीमा बल, वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ  फंड इंडिया, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी, कछुआ कंजर्वेशन और कतर्नियाघाट फाउंडेशन के प्रतिनिधि, 5 नामित पर्यावरण एवं पर्यटन विशेषज्ञ विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। साथ ही पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाली 2 अन्य ख्याति प्राप्त संस्थाओं का चयन प्रत्येक 2 वर्ष के लिए किया जाएगा।

कार्यकारी समिति के अध्यक्ष होंगे मुख्य सचिव
ईको टूरिज्म कार्यकारी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव और सदस्य सचिव (पदेन) अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव, पर्यटन (वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों एवं वन क्षेत्रों के लिए) और सदस्य सचिव महानिदेशक पर्यटन (वन क्षेत्र से बाहर प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों व शेष क्षेत्रों के लिए) होंगे। ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपेक्षित कार्यवाही का दायित्व कार्यकारी समिति का होगा।

देशी-विदेशी पर्यटक होंगे आकर्षित
ईको टूरिज्म विकास बोर्ड की ओर से ट्रैकिंग, हाइकिंग, साइक्लिंग, कैरावन टूरिज्म, सी-प्लेन, रिवर क्रूज, एडवेंचर टूरिज्म, होटल एंड रिसॉर्ट, अवस्थापना सुविधाओं का विकास, बैलूनिंग, जंगल कैंपिंग, वेलनेस टूरिज्म, आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा जैसी गतिविधियां चलाई जाएंगी। प्रदेश के करीब 16582 वर्ग किमी वन क्षेत्र में अनेक सुंदर स्थान और पक्षियों और जानवरों की उपलब्धता है। राज्य में एक राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यजीव अभयारण्य हैं, इनमें 12 पक्षी विहार भी हैं। इसलिए पर्यटन, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, आयुष और ग्राम्य विकास विभाग जैसे अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर उप्र. ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया जा रहा है, जिससे देशी-विदेशी पर्यटक आकर्षित हो सकें। साथ ही रोजगार और राजस्व में वृद्धि हो सकेगी। ईको टूरिज्म जोन में पीपीपी के आधार पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा।

प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर में अब रक्षा हथियार और आयुध बनाने वाली कंपनियों को जमीन आवंटित हो सकेगी। योगी कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में उप्र. रक्षा एवं एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2018 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे रक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को नीति के अनुसार निवेश पर सब्सिडी भी दी जाएगी। नीति में संशोधन कर डिफेंस टेस्टिंग यूनिट और डिफेंस पैकेजिंग सहित 13 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा।

नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने डिफेंस टेस्टिंग आधारभूत संरचना की घोषणा की है। इसके तहत देश में 8 ग्रीन फील्ड डिफेंस टेस्टिंग की आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से देश के दोनों डिफेंस कॉरिडोर में दो-दो सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। इसमें राज्य सरकार भूमि एवं आवश्यक वित्तीय मदद प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि ऐसी इकाई जिसने भारत सरकार के संबंधित अधिनियमों के तहत कतिपय डिफेंस आइटम अथवा आर्म्स एंड ऐम्युनिशन आइटम मैन्युफैक्चरिंग के लिए लाइसेंस प्राप्त कर लिया है और मैन्युफैक्चरिंग शुरू करना चाहती है उसे कॉरिडोर में भूमि उपलब्ध कराने की वर्तमान में व्यवस्था नहीं है। ऐसी नई इकाइयों को भी रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई की परिभाषा में शामिल करते हुए भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

निवेशकों को मिलेगी अधिकतम 500 करोड़ की सब्सिडी
रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई उत्पादों में सामग्री, उपकरण, उपस्कर विनियोजन, इकाई उप संयोजक तथा उपस्कर शामिल होंगे। रक्षा, एयरोस्पेस इकाई उत्पादों में इन उत्पादों के परिवहन के लिए विशिष्ट लॉजिस्टिक्स वाहनों, संयंत्रों को भी शामिल किया जाएगा। डिफेंस कॉरिडोर में रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण इकाइयों को निवेश पर सात प्रतिशत (अधिकतम 500 करोड़) रुपये सब्सिडी दी जाएगी। बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित होने वाली सभी रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण इकाइयों  को 10 प्रतिशत (अधिकतम 500 करोड़ रुपये) सब्सिडी दी जाएगी। इकाइयों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दी जाने वाली सब्सिडी 50 करोड़ से अधिक नहीं होगी। डिफेंस नोड के तहत अधिग्रहीत औद्योगिक क्षेत्र में विद्युत प्रणाली, जलापूर्ति, सीवर एवं सड़क की सुविधा दी जाएगी और पेरिफेरल बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे देश की रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम होगी और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।

एटा जिले में जवाहरपुर विद्युत उत्पादन निगम, राज्य विद्युत उत्पादन निगम और उ.प्र. जल विद्युत निगम का आपस में विलय कर एक निगम बनाया जाएगा। तीनों निगमों के निदेशक मंडल द्वारा पारित विलय के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया। इसके साथ ही कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश विद्युत सुधार (राज्य उत्पादन कंपनियों का समामेलन एवं विलय) योजना-2021 को भी अनुमोदित कर दिया है। कैबिनेट ने इस विलय योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आगे की कार्यवाही के लिए राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को अधिकृत करने का भी निर्णय किया है।  प्रस्तावित विलय से कंपनियों के संचालन में तालमेल, खर्चों में कमी, दक्षता और प्रशासनिक नियंत्रण, मशीनरी स्पेयर पार्ट्स आदि सहित संसाधनों का सही उपयोग संभव हो सकेगा। साथ ही प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता 6,134 मेगावाट से बढ़कर 7,979 मेगावाट हो जाएगी।

कैबिनेट ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के राजधानी में जगत नारायण रोड स्थित सेवानिवृत्त डॉ.पीके शर्मा के आवास के ध्वस्तीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस भवन को गिराने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा यहां एक नए भवन का निर्माण किया जाएगा।

प्रदेश के सभी शहरों में एक समान अंबार शुल्क लिए जाने से संबंधित नियमावली को कैबिनेट ने वापस लौटा दिया है। कैबिनेट ने आवास विभाग को प्रस्तावित नियमावली के कुछ बिंदुओं पर असहमति जताते हुए संशोधित प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कैबिनेट ने आवास विभाग को छोटे और बड़े  शहरों के हिसाब से अंबार शुल्क का श्रेणीवार निर्धारण करने का सुझाव दिया है।

आवास विभाग में मंगलवार को कैबिनेट में रखे गए अंबार शुल्क नियमावली के प्रस्ताव में सभी शहरों के लिए एक समान अंबार शुल्क लिए जाने की व्यवस्था की गई थी। बता दें कि शहरी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरण मकान बनाने के लिए जब नक्शा पास कराता है तो उससे अंबार शुल्क लिया जाता है। इसके लिए अभी तक कोई नियमावली नहीं है। आवास विभाग ने इसके लिए नियमावली तैयार करते हुए कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा था। इसमें 1000 वर्ग मीटर तक 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर, 1000 से 5000 तक 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर, 5000 से 10000 तक 35 और 10 हजार वर्ग मीटर से अधिक होने पर 25 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है।

अंबार शुल्क की गणना टेलीस्कोपिक ढंग से की जाएगी। यानी इससे फोटो लेते हुए यह पता लगाया जाएगा कि कितना मलबा सड़क पर रखा गया है। कैबिनेट की बैठक में सुझाव दिया गया है कि छोटे और बड़े  शहरों के लिए एक समान दरें नहीं होनी चाहिए।

प्रदेश सरकार ने जनसुविधाओं यानी सड़क, पार्क, एसटीपी आदि के लिए जमीन देने वालों को आदर्श हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) देगी। इसके लिए अनुज्ञा उपविधि2022 को कैबिनेट ने मंजूरी दे है। जमीन देने वाला इस टीडीआर अपनी दूसरी जमीन पर अधिक ऊंची इमारत बनाने में स्वयं इस्तेमाल कर सकेगा या किसी बिल्डर को बेचकर उस स्थान पर जमीन की कीमत के बराबर पैसे कमा सकेगा।

प्रस्ताव के मुताबिक शहरों में महायोजना यानी मास्टर प्लान में सड़क, पार्क, खुले क्षेत्र, बस स्टेशन, एसटीपी और इसी प्रकार की अन्य जन सुविधाओं के लिए जमीनें आरक्षित की जाती हैं। इस नीति के बाद ऐसी जमीनों को भू-स्वामी विकास प्राधिकरणों को देगा तो उसे टीडीआर दिया जाएगा। टीडीआर जमीन की कीमत के बराबर होगा। इसमें फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) का विवरण होगा। टीडीआर धारक इसके आधार पर अनुमन्य एफएआर के अंतर्गत विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराने के बाद उसके अनुरूप दूसरी जमीन पर उतना अतिरिक्त निर्माण कर सकेगा या फिर किसी बिल्डर को बेचने पर वह उतने निर्मित होने वाले क्षेत्रफल के बराबर पैसा ले सकेगा।

महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उड़ीसा व पंजाब जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है। नीति आयोग ने 2020 में दिशा-निर्देश जारी करते हुए राज्यों को इसे बनाने की अपेक्षा की थी। यूपी में इस नीति के लागू होने के बाद विकास योजनाओं के लिए जहां आसानी से जमीनें मिलेंगी वहीं इससे रोजगार की नई राह खुलेगी।

प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल के अलावा छोटे शहरों में ट्रांजिट इंटरवेंशन जैसे मेट्रो नियो का संचालन हो रहा है या संचालित करने का प्रस्ताव है। इसलिए सरकार ने ऐसी परियोजनाओ के आसपास के क्षेत्रों में आधुनिक शहर बसाने फैसला किया है। सरकार ने इन क्षेत्रों में आवासीय व व्यवसायिक योजना शुरू करने वालों को प्रोत्साहित भी करेगी। इसी उद्देश्य से आवास विभाग द्वारा तैयार की गई ‘उप्र ट्रांजिट ओरिएंटेड विकास नीति.2022’ (टीओडी) को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी गई है। सरकार का मानना है कि इस नीति के लागू होने के बाद ट्रांजिट परियोजनाओं के आसपास जहां सुनियोजित शहरों को बसाने में मदद मिलेगी, वहीं, इससे रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध होंगे।

दरअसल तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों के सुनियोजित विकास और अवस्थापना सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल ट्रांजिट ओरिएंटेड डवलपमेंट नीति जारी की है। राज्यों को इसके आधार पर टीओडी नीति बनानी है। राज्य सरकार यूपी में विविध वृहद मास ट्रांजिड परियोजनाओं पर काम करा रही है। इसमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा व ग्रेटर नोएडा में मेट्रो रेल और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रीजनल रैपिड ट्रांजिट यानी रैपिड रेल परियोजना पर काम चल रहा है। छोटे शहरों में अन्य ट्रांजिट इंटरवेशन जैसे मेट्रो नियो पर जल्द काम शुरू होने वाला है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री ने आवास विभाग को केन्द्र की नीति की तर्ज पर यूपी के संदर्भ में भी टीओडी नीति तैयार करने को कहा था। इसी कड़ी में आवास विभाग ने यह नीति तैयार किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ट्रांजिट परियोजनाओं के आसपास काफी जमीनें उपलब्ध होती हैं। इस नीति केलागू होने के बाद इन क्षेत्रों में वैल्यू कैप्चर फाइनेंस इंस्ट्रूमेंट्स द्वारा ट्रांजिट सिस्टम की वित्तीय स्थिरता में वृद्धि और टीओडी जोन में आधारभूत सुविधाओं के लिए सघन विकास और मिश्रित भू-उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही ट्रांजिट नेटवर्क की राइडरशिप में भी वृद्धि होगी। टाउन प्लानिंग विशेषज्ञ और वास्तुविदों के माध्यम से टीओडी जोन तैयार किए जाएंगे। इससे इन दोनों संवर्गों को रोजगार का मौका भी मिलेगा।

ट्रांजिट जोन के लिए काम करने वाली कंपनियों को आसपास के जमीनों पर कम जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाने का मौका दिया जाएगा। इसके लिए दो श्रेणियां तय की गई हैं। दस हजार वर्ग मीटर तक की जमीनों पर अविकसित क्षेत्र में 3.5 फ्लोर एरिया रेशियो (टीओडी एफएआर) दिया जाएगा। सामान्यत: 1.5 एफएआर दिया जाता है। इतने में ढाई मंजिला इमारतें बनाई जाती हैं। अतिरक्त एफएआर दिए जाने पर और अधिक ऊंची इमारतें बनेंगी। विकसित क्षेत्र में 3 टीओडी. एफएआर व घनी आबादी वाले क्षेत्रों में 2.5 टीओडी. एफएआर दिया जाएगा। दस हजार वर्ग मीडर से अधिक जमीन पर 12 मीटर चौड़ी सड़क पर 3.5 टीओडी. एफएआरए 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर 4 टीओडी. एफएआर और 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क वाले क्षेत्रों में 5 टीओडी. एफएआर दिया जाएगा।

विस्तार

आजादी के 75 साल पूरा होने पर योगी सरकार ने प्रदेश की जेलों को ब्रिटिश काल के मैनुअल से आजादी दे दी है। सभी बंदियों को न सिर्फ घर जैसा खाना दिया जाएगा, बल्कि जेल के बंदी रक्षकों को भी आधुनिक हथियारों से लैस किया जाएगा। कारागार विभाग द्वारा तैयार किए गए इससे संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। ‘उप्र जेल मैनुअल 1941’ के अनुपयोगी हो चुके प्रावधानों को समाप्त कर प्रस्तावित ‘उप्र जेल मैनुअल 2022’ में बंदियों के लिए तमाम नई सुविधाएं भी दी जाएंगी। इसमें बंदी अपराधियों के अपराध करने के नए-नए तरीकों  से निपटने के उद्देश्य से कारागार प्रशासन व प्रबंध व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाने का प्रस्ताव शामिल है। नए संशोधन में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्मित मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 के प्रावधानों को लागू किया जाएगा।

शिशुकक्ष व बालवाड़ी की व्यवस्था

कारागार राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि नये मैनुअल के मुताबिक जेल में निरूद्ध महिलाओं के साथ रहने वाले 6 वर्ष तक के बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए एक शिशुकक्ष और एक बालवाड़ी (नर्सरी) की व्यवस्था होगी। 3 साल से कम उम्र के बच्चों को शिशु कक्ष में और  3 साल से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों का देखभाल बालवाड़ी में किया जाएगा। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के साथ ही इनके मनोरंजन, टीकाकरण और पौष्टिक भोजन देने की भी व्यवस्था होगी। मां की सहमति से 4 से 6 साल की आयु वाले बच्चों को जेल से बाहर भी किसी विद्यालय में प्रवेश कराया जा सकेगा। उसके स्कूल जाने के लिए वाहन की व्यवस्था सरकारी खर्चे पर होगा।

ये छह जिला जेल होंगे हाई सिक्योरिटी

लखनऊ, चित्रकूट, गौतमबुद्धनगर, आजमगढ़, ललितपुर व बरेली

चार श्रेणियों में बांटे जाएंगे जेल

मौजूदा व्यवस्था में जिला कारागारों में बंदी संख्या के आधार पर 5 श्रेणियां हैं। इसमें 500 से अधिक, 301 से 500 तक, 151 से 300 तक 101 से 150 तक 01 से 100 तक निर्धारित थीं। नये मैनुअल में चार श्रेणियां होंगी। श्रेणी-ए की कारागार में 2000 से अधिक बंदी, श्रेणी-बी में 1501 से 2000, श्रेणी-सी में 1001 से 1500 और श्रेणी-डी में 1000 तक बंदी।

बंदी रक्षकों को रायफल के स्थान पर 9 एमएम की पिस्टल

अब तक बंदी रक्षकों को अंग्रेजों के जमाने की 303 रायफल ही मिलती थी। अब उन्हें 9 एमएम की पिस्टल, इन्सास और कार्बाइन मिलेगी। इससे वे खूंखार अपराधियों से निपटने में सक्षम होंगे। आपात स्थिति में स्थिति नियंत्रित करने के लिए बाहरी फोर्स की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। बंदियों की सुरक्षा के लिए चेस्ट गार्ड, एल्बोगार्ड, फाइबर ग्लास, हेलमेट, पॉली कॉर्बोनेट शील्ड व लाठी के अलावा दंगारोधी टीजर गन आंसू गैस, वाटर कैनन, शॉक बटन, पेपर वॉल गन भी मुहैया कराया जाएगा।

महिला बंदियों को ये सुविधाएं

– मंगल सूत्र व सलवार-सूट पहने की छूट मिलेगी।

– सेनेटरी नैपकिन, नारियल तेल एवं शैम्पू मिलेगा।

– कारागार में जन्में बच्चों का जन्म पंजीकरण, टीकाकरण एवं नामकरण कराया जाएगा

 – बच्चों के लिये क्रेच, नर्सरी, खेलकूद, मनोरंजन और शिक्षा की व्यवस्था

– गर्भवती एवं नर्सिग माताओं को पौष्टिक आहार व चिकित्सीय सुविधायें

– टूथ पाउडर, चप्पल, कूलर मिलेगा।

पुरुष बंदियों को मिलेगी यें सुविधाएं

– दाढ़ी बनाने के लिए कैन्टीन से खरीद सकेंगे कारट्रिज रेजर

– नाई एवं कपड़ा धुलाई भी करा सकेंगे

बंदियों को रोज मिलेगी चटनी, त्योहारों पर सेंवई व खीर

यूपी के नए जेल मैनुअल में बंदियों को सप्ताह में दो बार के स्थान पर प्रतिदिन चटनी, माह में एक बार कढ़ी चावल, प्रतिदिन शाम को चाय, कारागारों में बेकरी की व्यवस्था और ईद एव बकरीद पर सेवई एवं होली, दीपावली एवं राष्ट्रीय पर्वों पर खीर एवं व्रत के समय विशेष भोजन दिया जाएगा। हिंदू बन्दियाें को शिवरात्रि, रामनवमी, अनंत चतुर्दशी, देवोत्थानी एकादशी, जन्माष्टमी, नवरात्रि, करवा चौथ, तीज और भीम एकादशी पर और मुस्लिम बंदियों को रोजा रखने की अनुमति होगी।

इसमें महिलाओं के स्वास्थ्य पर खास फोकस किया गया है। उन्हें नहाने और कपड़ा धोने के लिए जहां अब साबुन देने का प्रावधान किया गया है, वहीं, प्रतिमाह 60-60 ग्राम सरसों और नारियल का तेल भी दिया जाएगा। जबकि बाल धुलने के लिए 20 एमएल शैंपू भी दिए जाएंगे। इसी प्रकार नए जेल मैनुअल में बंदियों की शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

जेल में ही बंदियों के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में सभी राज्य के सभी सरकारी विभाग, एनजीओ, शिक्षाविद्,  कॉरपोरेट घराने, व्यवसायी या कोई अन्य मान्यता प्राप्त एजेंसी शामिल हो सकेंगी। इस कार्यक्रम के तहत बंदियों के शारीरिक और स्वास्थ्य शिक्षा, अकादमिक शिक्षा, सामाजिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा व सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा।

कतिपय प्रतिबंधों के साथ बंदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की भी सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा जेल में उद्योग व बंदियों की सहकारी समितियों का भी गठन किया जाएगा। कारागार मुख्यालय पर कारागर महानिदेशक की अध्यक्षता में कौशल विकास कार्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा प्रशिक्षण समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति बंदियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम कराने की योजना तैयार करने समेत अन्य काम करेगी। बंदियों को रेडीमेड कपड़े तैयार करने, निर्माण कार्य, बढ़ईगिरी, प्लंबरिंग, इलेक्ट्रिशियन, दर्जी, चमड़ा और कृषि, मुर्गी पालन और कम्प्यूटर चलाने का प्रशिक्षण दिया दिया जाएगा?

अप्रसांगिक हो चुकी ये व्यवस्थाएं भी होंगी समाप्त

– लॉकअप जेल की व्यवस्था समाप्त

– यूरोपीय बंदियों के लिए अब अलग जेल की व्यवस्था नहीं होगी

– रजवाड़ों के बंदी के लिए मुक्ति और स्थानांतरण की व्यवस्था

– नेपाल, भूटान, सिक्किम एवं कश्मीर के बंदियों की मुक्ति और स्थानांतरण की व्यवस्था खत्म

– क्षय रोग से ग्रसित बंदियों के लिए जिला कारागार सुल्तानपुर के निर्धारण की व्यवस्था खत्म

– कालापानी की सजा के लिए कैदी अब पोर्ट ब्लेयर स्थानांतरित नहीं होंगे

– जेलों में अब नहीं बनेंगे शुष्क शौचालय, जेलों में लालटेन की व्यवस्था खत्म

सभी जेल में रखें जाएंगे टीबी रोगी

टीबी से ग्रसित बंदियों के लिए सिर्फ सुल्तानपुर जेल के निर्धारण की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। यानि अब ऐसे रोगी प्रदेश के सभी जेल में रह सकते हैं। वहीं उनका इलाज होगा।

ये भी हैं प्रमुख संशोधन

– एक ही जेल में निरुद्ध रक्त संबंधी एवं पति-पत्ली अब आपस में मुलाकात कर सकेंगे

– रक्त संबंधी अथवा पति-पत्नी की मृत्यु पर अंतिम दर्शन की होगी व्यवस्था

– विदेशी बंदियों की से भी हो सकेगी मुलाकात

– बंदियों से मुलाकात करने वालों को दिखाना होगा फोटोयुक्त पहचान पत्र

– अब किसी बंदी द्वारा जेल में अपराध करने पर उसे हथकड़ी व बेड़ी नहीं लगाया जाएगा और न ही उसे तनहाई में डाला जाएगा।

– बंदियों को मई व जून को छोड़कर सभी महीनों में चाय के साथ 4 बिस्किट मिलेंगे

– जेलों में पके हुए सामान बनाने के लिये बेकरी की होगी स्थापना

– निराश्रित बंदियों को चप्पल दिया जाएगा, पर रिहाई के समय जमा करना होगा।

– सभी जेलों में एक बंदी कल्याण कैंटीन तथा बंदी कल्याण कोष की स्थापना होगी

– जेल बंदियों की एक पंचायत होगी, जेल प्रशासन करेगा पंचायत के कामकाज की निगरानी

– बंदी की मृत्यु पर सीएमओ की देखरेख में अनिवार्य होगा पोस्टमार्टम



Source link