केंद्रीय कैबिनेट ने गेहूं और मैसलिन आटे के निर्यात पर पाबंदी को मंजूरी दी, जानें कारण


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने आटे के निर्यात पर बड़ा फैसला लिया है। कमिटी ने अपनी बैठक में गेहूं और मैसलिन आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने को अपनी मंजूरी दे दी है। 

बता दें कि वर्ष 2021-22 में भारत ने 24 करोड़ 65.7 लाख डॉलर के गेहूं के आटे का एक्सपोर्ट किया था। बीते मई महीने में भीषण गर्मी के दौरान गेहूं के उत्पादन से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इसकी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन की पूरी दुनिया में आटे के निर्यात में 25% की हिस्सेदारी है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच जारी जंग से वहां से आटे का निर्यात नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर इस जंग के कारण दुनियाभर की सप्लाई लाइन भी प्रभावित है। इन कारणों  के  ग्लोबल मार्केट में गेहूं के भाव बढ़े हुए हैं। इस स्थिति में कारोबारी आटे के निर्यात में अधिक दिलचस्पी लेते हैं जिससे देश में गेहूं और आटे की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। 

जानकार मानते हैं कि सरकार ने ऐसी स्थिति से बचने के लिए और देश की 1.4 बिलियन की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करने के लिए गेहूं और आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है।  

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने आटे के निर्यात पर बड़ा फैसला लिया है। कमिटी ने अपनी बैठक में गेहूं और मैसलिन आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने को अपनी मंजूरी दे दी है। 

बता दें कि वर्ष 2021-22 में भारत ने 24 करोड़ 65.7 लाख डॉलर के गेहूं के आटे का एक्सपोर्ट किया था। बीते मई महीने में भीषण गर्मी के दौरान गेहूं के उत्पादन से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इसकी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन की पूरी दुनिया में आटे के निर्यात में 25% की हिस्सेदारी है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच जारी जंग से वहां से आटे का निर्यात नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर इस जंग के कारण दुनियाभर की सप्लाई लाइन भी प्रभावित है। इन कारणों  के  ग्लोबल मार्केट में गेहूं के भाव बढ़े हुए हैं। इस स्थिति में कारोबारी आटे के निर्यात में अधिक दिलचस्पी लेते हैं जिससे देश में गेहूं और आटे की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। 

जानकार मानते हैं कि सरकार ने ऐसी स्थिति से बचने के लिए और देश की 1.4 बिलियन की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करने के लिए गेहूं और आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है।  



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