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शी जिनपिंग के स्वागत के लिए सऊदी की राजधानी को सजा रहे हैं प्रिंस सलमान

ByNews Desk

Aug 13, 2022


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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते सऊदी अरब की यात्रा पर आ सकते हैं। ये खबर ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने दी है। अखबार ने बताया है कि रियाद में शी जिनपिंग के उस स्तर के स्वागत की तैयारी चल रही है, जैसा स्वागत डोनाल्ड ट्रंप का तब हुआ था, जब वे अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में पहली बार सऊदी अरब आए थे।

अखबार ने ध्यान दिलाया है कि जून में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का फीका स्वागत हुआ, जिसे अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में आए तनाव की निशानी माना गया। आम राय है कि निजी तौर पर बाइडन और सऊदी अरब के युवराज प्रिंस मोहम्मद-बिन-सलमान एक दूसरे को पसंद नहीं करते। अब प्रिंस सलमान शी जिनपिंग का गर्मजोशी से स्वागत करके अमेरिका को फिर बाइडन के प्रति अपनी नापसंदगी का संदेश भेजना चाहते हैं। व्यावहारिक रूप से सऊदी अरब की सत्ता अब प्रिंस सलमान के हाथ में ही है।

शी जिनपिंग ने 2019 में कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से किसी देश की यात्रा नहीं की है। इस तरह महामारी के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के तौर पर वे सऊदी अरब जाएंगे। द गार्जियन ने कहा है कि शी की इस यात्रा से यह धारणा मजबूत होगी कि चीन और सऊदी अरब अब निकट सहयोगी बन गए हैं। हालांकि दोनों देशों के करीब आने की शुरुआत दो दशक पहले ही हो गई थी, लेकिन प्रिंस सलमान के हाथ में सत्ता आने के बाद से इसकी गति काफी तेज हो गई है। इस दौर में हांगकांग से लेकर शिनजियांग तक के मसलों पर सऊदी अरब ने चीन का समर्थन किया है, जबकि पश्चिमी देशों ने इन दोनों जगहों पर मानव अधिकारों के हनन के आरोप लगाते रहे हैं।

अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलॉ मोहम्मद अल याह्या ने द गार्जियन से कहा- ‘चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। वह सऊदी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। भू-राजनीतिक लिहाज से चीन पश्चिम एशिया के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। वह अफ्रीका और अन्य जगहों पर सैनिक अड्डे बनाने की कोशिश में है। पहले उसके हित सिर्फ व्यापारिक थे। लेकिन अब वह इस क्षेत्र को रणनीतिक नजरिए से देखने लगा है।’ हडसन ने कहा कि उस क्षेत्र में चीन अमेरिका का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गया है, इसलिए अमेरिका में शी की इस यात्रा पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

शी जिनपिंग को रियाद यात्रा के लिए आमंत्रण इस वर्ष मार्च में ही दिया गया था। उनके स्वागत के लिए चल रही जोरदार तैयारियों का कारण यह है कि प्रिंस सलमान चीन से काफी खुश रहे हैं। चीन ने यमन में सऊदी अरब के आक्रमण, कतर के उसके बायकॉट, और पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर कोई टिप्पणी नहीं की है। पर्यवेक्षकों की राय है कि असल में चीन पश्चिम एशिया में उस जगह को भर रहा है, जो अमेरिका की यहां दिलचस्पी घटने से खाली हुई है।

द गार्जियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि शी इस यात्रा के दौरान रियाद, जेद्दाह और नियोम जाएंगे। इन सभी शहरों को इस समय शानदार ढंग से सजाया जा रहा है।

विस्तार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते सऊदी अरब की यात्रा पर आ सकते हैं। ये खबर ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने दी है। अखबार ने बताया है कि रियाद में शी जिनपिंग के उस स्तर के स्वागत की तैयारी चल रही है, जैसा स्वागत डोनाल्ड ट्रंप का तब हुआ था, जब वे अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में पहली बार सऊदी अरब आए थे।

अखबार ने ध्यान दिलाया है कि जून में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का फीका स्वागत हुआ, जिसे अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में आए तनाव की निशानी माना गया। आम राय है कि निजी तौर पर बाइडन और सऊदी अरब के युवराज प्रिंस मोहम्मद-बिन-सलमान एक दूसरे को पसंद नहीं करते। अब प्रिंस सलमान शी जिनपिंग का गर्मजोशी से स्वागत करके अमेरिका को फिर बाइडन के प्रति अपनी नापसंदगी का संदेश भेजना चाहते हैं। व्यावहारिक रूप से सऊदी अरब की सत्ता अब प्रिंस सलमान के हाथ में ही है।

शी जिनपिंग ने 2019 में कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से किसी देश की यात्रा नहीं की है। इस तरह महामारी के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के तौर पर वे सऊदी अरब जाएंगे। द गार्जियन ने कहा है कि शी की इस यात्रा से यह धारणा मजबूत होगी कि चीन और सऊदी अरब अब निकट सहयोगी बन गए हैं। हालांकि दोनों देशों के करीब आने की शुरुआत दो दशक पहले ही हो गई थी, लेकिन प्रिंस सलमान के हाथ में सत्ता आने के बाद से इसकी गति काफी तेज हो गई है। इस दौर में हांगकांग से लेकर शिनजियांग तक के मसलों पर सऊदी अरब ने चीन का समर्थन किया है, जबकि पश्चिमी देशों ने इन दोनों जगहों पर मानव अधिकारों के हनन के आरोप लगाते रहे हैं।

अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलॉ मोहम्मद अल याह्या ने द गार्जियन से कहा- ‘चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। वह सऊदी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। भू-राजनीतिक लिहाज से चीन पश्चिम एशिया के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। वह अफ्रीका और अन्य जगहों पर सैनिक अड्डे बनाने की कोशिश में है। पहले उसके हित सिर्फ व्यापारिक थे। लेकिन अब वह इस क्षेत्र को रणनीतिक नजरिए से देखने लगा है।’ हडसन ने कहा कि उस क्षेत्र में चीन अमेरिका का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गया है, इसलिए अमेरिका में शी की इस यात्रा पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

शी जिनपिंग को रियाद यात्रा के लिए आमंत्रण इस वर्ष मार्च में ही दिया गया था। उनके स्वागत के लिए चल रही जोरदार तैयारियों का कारण यह है कि प्रिंस सलमान चीन से काफी खुश रहे हैं। चीन ने यमन में सऊदी अरब के आक्रमण, कतर के उसके बायकॉट, और पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर कोई टिप्पणी नहीं की है। पर्यवेक्षकों की राय है कि असल में चीन पश्चिम एशिया में उस जगह को भर रहा है, जो अमेरिका की यहां दिलचस्पी घटने से खाली हुई है।

द गार्जियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि शी इस यात्रा के दौरान रियाद, जेद्दाह और नियोम जाएंगे। इन सभी शहरों को इस समय शानदार ढंग से सजाया जा रहा है।



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